Share

27 मई 2026

नई दिल्ली:
देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से सीमावर्ती (बॉर्डर) इलाकों में अवैध घुसपैठ के कारण आबादी के संतुलन में आ रहे बदलाव यानी जनसांख्यिकी परिवर्तन (डेमोग्राफिक चेंज) की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस गंभीर मुद्दे के स्थाई समाधान के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (हाई-पावर कमेटी) का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (पीपी नावलेकर) की अध्यक्षता में बनी यह समिति एक साल के भीतर इस बात का पूरा अध्ययन करेगी कि आखिर इन इलाकों में आबादी का ढांचा क्यों बदल रहा है, और इससे निपटने के क्या स्थाई उपाय हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इस समिति का कार्यकाल छह महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को लालकिले से इस संबंध में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने की घोषणा की थी।
ये दिग्गज होंगे समिति के सदस्य
इस हाई-लेवल कमेटी में देश के कई अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और सटीक हो। इस समिति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस पीपी नावलेकर (समिति के अध्यक्ष)
पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र (सदस्य)
पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव (सदस्य)
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की सदस्य और मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि (सदस्य)
इनके अलावा भारत के जनगणना आयुक्त और गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी नागरिक) को भी इस समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गठन के साथ ही इस समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है।
घुसपैठ देश के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती: अमित शाह
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि अवैध घुसपैठ और अन्य कारणों से आबादी के ढांचे में आने वाला यह असामान्य बदलाव किसी भी देश के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होता है। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि जनसांख्यिकी परिवर्तन देश की संप्रभुता के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, हमारी सामाजिक संरचना और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील और बड़ी समस्या है। यह समिति पूरे भारत में अवैध घुसपैठ के कारणों का व्यापक मूल्यांकन करेगी और समय पर इसका एक सटीक समाधान पेश करेगी। इसके अलावा, यह समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर भी इस बदलाव का विश्लेषण करेगी और अवैध प्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समय पर पहचान सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
लालकिले से पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए इस गंभीर खतरे के बारे में आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि आज देश के सामने एक बड़ी चिंता और चुनौती खड़ी है, जहां एक सोची-समझी साजिश के तहत देश की जनसांख्यिकी (आबादी के ढांचे) को बदलने की कोशिश की जा रही है। पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा था कि ये घुसपैठिए हमारे देश के युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं और हमारी बहनों व बेटियों को निशाना बना रहे हैं, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये लोग आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और खासकर सीमावर्ती इलाकों में होने वाले ये बदलाव हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए इस समिति का गठन कर काम को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।


Share