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20 मई 2026

नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दो बेहद महत्वपूर्ण मामलों पर बड़े फैसले सुनाए हैं। कोर्ट ने एक तरफ जहां सड़कों पर प्रदर्शन के नाम पर चक्काजाम करने वालों को कड़ी नसीहत दी है, वहीं दूसरी तरफ आवारा और खतरनाक कुत्तों के आतंक से आम जनता को बचाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही अदालत ने जमानत को लेकर भी एक बड़ा और दूरगामी फैसला सुनाया है।

प्रदर्शन के नाम पर आम जनता को परेशान करना ठीक नहीं
भारत के प्रधान न्यायाधीश ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि देश के नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। कानून ने सबको यह हक दिया है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप सड़कों को ब्लॉक कर दें और कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में ले लें।
कोर्ट ने कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि प्रदर्शन कीजिए, लेकिन धमकी मत दीजिए। प्रदर्शन ऐसा होना चाहिए जिससे दूसरों को दिक्कत न हो। सड़कों पर उतरकर आम आदमी के लिए मुसीबतें खड़ी करना ठीक नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने यह भी साफ किया कि सरकार को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसका आदेश सुप्रीम कोर्ट नहीं दे सकता।

खतरनाक कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा और खतरनाक कुत्तों की समस्या पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जो आवारा कुत्ते बेहद खतरनाक हो चुके हैं या रेबीज से संक्रमित हैं, उन्हें इंजेक्शन लगाकर मौत की नींद सुलाया जा सकता है, क्योंकि लोगों की जान की हिफाजत करना सबसे जरूरी है। कोर्ट ने माना कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर रहना भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि नवंबर 2025 में आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर जो निर्देश दिए गए थे, वही लागू रहेंगे। अगर कोई अधिकारी इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उस पर अदालत की अवमानना का केस चलेगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आठ मुख्य बातें:
1. राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड के नियमों को मजबूत करें और उन्हें सही तरीके से लागू करें।
2. हर जिले में पूरी तरह से काम करने वाला एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर यानी नसबंदी केंद्र बनाया जाए।
3. जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की आबादी ज्यादा है, वहां जरूरी रिहैब सेंटर्स की संख्या बढ़ाई जाए।
4. दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी इन नियमों को लागू करने पर विचार किया जाए।
5. पूरे राज्य में एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि कमी न हो।
6. हाईवे पर आवारा पशुओं की वजह से होने वाली समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
7. रेबीज से गंभीर रूप से संक्रमित कुत्तों को यूथेनेसिया यानी दया मृत्यु जैसे कदम उठाकर हटाया जा सकेगा।
8. नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को इस काम के लिए कानूनी सुरक्षा दी जाए और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो।

किसी को सालों तक जेल में नहीं रख सकते: सुप्रीम कोर्ट
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायाधीश बीवी नागरत्ना और न्यायाधीश उज्ज्वल भुइयां शामिल थे, ने जमानत को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि जमानत पाना किसी भी नागरिक का मूलभूत अधिकार है।
अदालत ने कहा कि चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो और कानून कितना भी सख्त क्यों न हो, किसी भी व्यक्ति को बिना दोष सिद्ध हुए सालों तक जेल में बंद नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़कर देखा है, जिसके बाद इस फैसले को बेहद दूरगामी माना जा रहा है।


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