सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर आज अहम सुनवाई

khabar pradhan

संवाददाता

16 April 2025

अपडेटेड: 11:43 AM 0thGMT+0530

70 से ज्यादा याचिकाओं में विरोध, 7 राज्य समर्थन में, 1995 का कानून भी चुनौती के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट में आज वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 और 1995 के वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 70 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ दोपहर 2 बजे इस मामले की सुनवाई करेगी। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि कोई भी फैसला सुनाने से पहले उनका पक्ष सुना जाए।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025: क्या है मामला?
वक्फ (संशोधन) बिल को हाल ही में संसद में पारित किया गया और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया। केंद्र सरकार ने इसके लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया है। यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। केंद्र का दावा है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की भलाई के लिए है, लेकिन कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे संविधान विरोधी और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया है।
नए कानून में वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन, ऑडिट और गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। विपक्ष का आरोप है कि ये प्रावधान वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कमजोर करते हैं और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं।


सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं और पक्ष-विपक्ष
विरोध में याचिकाएं: जमीयत उलमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड, और कई विपक्षी दलों सहित विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों ने 70 से अधिक याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं में दावा किया गया है कि नया कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), और 26 (धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार) का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ताओं ने 1995 के वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी है।
समर्थन में राज्य: केंद्र के पक्ष में सात राज्य सरकारें (उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, और हिमाचल प्रदेश) सामने आई हैं। इनका कहना है कि नया कानून वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।
केंद्र का रुख: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल कर कहा है कि वक्फ संशोधन बिल समुदाय के हित में है और इसे लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया गया। सरकार ने अदालत से कोई भी अंतरिम आदेश देने से पहले उसका पक्ष सुनने की मांग की है।
देशभर में विरोध और राजनीतिक घमासान
वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। मुस्लिम संगठनों ने इसे “मुस्लिम विरोधी” करार दिया है, जबकि विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), और AIMIM ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की थी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में मुस्लिम नेताओं के साथ बैठक में वक्फ बोर्ड में गड़बड़ियों को रोकने की बात कही, लेकिन साथ ही उन्होंने BJP पर बंगाल की छवि खराब करने के लिए फर्जी वीडियो फैलाने का आरोप भी लगाया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड केस में ED की कार्रवाई को लेकर देशभर में प्रदर्शन किया, जिसमें केंद्र पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया गया।
X पर कई पोस्ट्स में इस कानून को लेकर तीखी बहस देखने को मिली है। कुछ यूजर्स इसे “मुस्लिम समुदाय के खिलाफ साजिश” बता रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह पारदर्शिता के लिए जरूरी है। हालांकि, ये पोस्ट्स केवल जनभावना को दर्शाते हैं और तथ्यात्मक सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किए जा सकते।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का महत्व
आज की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तय करेगी कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस कानून पर अंतरिम रोक लगाएगा या इसे लागू रहने देगा। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि कानून को निलंबित किया जाए और इसकी वैधता की गहन जांच हो। दूसरी ओर, केंद्र और समर्थक राज्य चाहते हैं कि कानून लागू रहे।
पिछले कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी, और आज की सुनवाई में दोनों पक्षों के वकील अपने तर्क पेश करेंगे।
आगे क्या?
वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर चल रहा विवाद न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी संवेदनशील है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को प्रभावित करेगा, बल्कि केंद्र और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी को भी नई दिशा दे सकता है। अगर अदालत इस मामले में अंतरिम रोक लगाती है, तो यह विपक्ष के लिए बड़ी जीत होगी। वहीं, अगर कानून लागू रहता है, तो केंद्र इसे अपनी नीतिगत सफलता के रूप में पेश कर सकता है।

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