12 June 2026
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के दौरान गुरुवार को पाकिस्तानी रेंजर्स ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. इस ताजा गोलीबारी में 16 और लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों समेत 37 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.
बीते शुक्रवार से शुरू हुए इस दमनकारी अभियान में अब तक मरने वालों की कुल संख्या 53 हो चुकी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना किसी चेतावनी के सीधे शांतिपूर्ण भीड़ पर गोलियां चलाईं, जिससे डैरा ईदगाह इलाके में चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे.
डैरा ईदगाह मैदान में उमड़ा था जनसैलाब, बातचीत के बाद भी हुआ हमला
यह खूनी संघर्ष उस समय हुआ जब रावलकोट के 30 आंदोलनकारियों के लिए न्याय की मांग को लेकर डैरा ईदगाह इलाके में लोग इकट्ठा हुए थे. गुरुवार को मस्जिद के लाउडस्पीकरों से किए गए एलान के बाद करीब 70 हजार लोग ईदगाह मैदान में जमा हो गए थे. चश्मदीदों के मुताबिक, बुधवार रात को प्रदर्शनकारियों और स्थानीय अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई थी. इसके बावजूद गुरुवार सुबह बिना किसी उकसावे के अचानक गोलियां बरसाई जाने लगीं.
रावलकोट के यूनिवर्सिटी एरिया में जब जेएएसी की रैली आगे बढ़ रही थी, तो सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर सीधी फायरिंग शुरू कर दी. इस हिंसक झड़प के बाद पूरे इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण और गंभीर हो गई है और इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है.
जेएएसी के चेयरमैन को बनाया निशाना, भड़की हिंसा में 30 और मरे
इस नरसंहार के विरोध में पूरे पीओके में गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. पुलिस ने विरोध-प्रदर्शनों के बीच जेएएसी के चेयरमैन उमर नजीर के काफिले को भी निशाना बनाया, जिसमें शाहजेब नाम के एक व्यक्ति को गोली लगी और उसकी मौत हो गई.
अपने युवा नेता शाहजेब की हत्या की खबर फैलते ही लोग भड़क उठे और पूरे इलाके में भीषण हिंसा भड़क गई. इस नए हिंसक टकराव में 30 और लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए हैं. इस हत्याकांड के विरोध में रावलकोट, खई गिट्टा और खांई गांवों में लोगों ने बाजार पूरी तरह बंद कर दिए हैं और पाकिस्तान विरोधी नारों के साथ बड़े मार्च निकाले जा रहे हैं.
फारुक अब्दुल्ला ने जताई चिंता, संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग
पीओके में हो रहे इस नरसंहार को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने गहरा दुख और चिंता जताई है. उन्होंने इस बर्बरतापूर्ण कार्रवाई को रोकने की अपील करते हुए कहा कि वहां स्थिति बेहद गंभीर और डरावनी बनी हुई है.
श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके के लोग इस समय बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और वहां के आम नागरिकों पर भयंकर जुल्म ढाया जा रहा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर खींचते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से अपील की है कि वे इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए तुरंत दखल दें और इस कत्लेआम को रुकवाएं.


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