स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से गिरा
संवाददाता
12 March 2026
अपडेटेड: 11:48 AM 0thGMT+0530
12 मार्च 2026
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया। सच कहा जाए तो यह परिणाम पहले से तय था, यह बात सत्ता पक्ष ही नहीं प्रस्ताव लाने वाले विपक्षी सांसद भी अच्छी तरह से जानते थे इसीलिए यह पूरा प्रकरण लोकतांत्रिक चिंता से ज्यादा राजनीतिक अभिनय जैसा ही लगा । अध्यक्ष का पद किसी एक दल का नहीं पूरे सदन का होता है, संसदीय परंपरा में इस पद की गरिमा इतनी ऊंची मानी गई है, कि इसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना असाधारण स्थिति में ही उचित समझा जाता है। लेकिन विपक्ष खासकर कांग्रेस ने इसे भी राजनीतिक हथियार बना लिया और आरोप लगाया कि अध्यक्ष पक्षपात कर रहे हैं ।लेकिन आरोप के समर्थन में कोई ठोस तथ्य नहीं दे पाए ।
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे सदन के होते हैं, इसलिए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना उचित नहीं है।
अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का काम सदन को नियमों के अनुसार चलाना है। यदि कोई सदस्य नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसका माइक्रोफोन बंद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संसद कोई मेला नहीं है, यहां अनुशासन और नियमों का पालन जरूरी है।
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष बार-बार यह आरोप लगाता है कि उसे बोलने का मौका नहीं दिया जाता, जबकि वास्तविकता यह है कि लोकसभा में कांग्रेस को 157 घंटे 55 मिनट बोलने का समय दिया गया। इसके बावजूद विपक्ष यह कहता रहता है कि उसे अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता।
चर्चा के दौरान शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। लेकिन जब बोलने का अवसर मिलता है तो वे सदन में कम और बाहर ज्यादा दिखाई देते हैं। शाह के इस बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई और सदन में नारेबाजी भी हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद की मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। यदि कोई सदस्य नियमों के खिलाफ आचरण करता है तो अध्यक्ष को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि संसद में नियमों का पालन जरूरी है और लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार चलाने का अधिकार है। यदि कोई सदस्य नियमों का पालन नहीं करता है तो अध्यक्ष को कार्रवाई करने का अधिकार भी है।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद में राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के कदम पर सवाल उठाए और कहा कि यह संसदीय परंपरा के खिलाफ है।
शाह ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं और संसद की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाने जैसा है।
इस दौरान विपक्ष ने भी सरकार के रवैये पर आपत्ति जताई और कहा कि संसद में कई बार विपक्ष की आवाज दबाई जाती है। इस मुद्दे को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।