14 अप्रैल 2026

नई दिल्ली:
मिडल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब समुद्र तक पहुंच गई है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वे ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके तेल व्यापार को पूरी तरह रोकना चाहते हैं।
ईरान का कड़ा रुख
अमेरिका की इस कार्रवाई पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने सख्त नाराजगी जताई है। ईरान ने इसे समुद्री डकैती करार दिया है और चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी युद्धपोत उनकी सीमा की ओर बढ़े, तो वे हर बंदरगाह पर हमला करने की ताकत रखते हैं। ईरान का कहना है कि वे इस घेराबंदी को युद्ध की शुरुआत मानेंगे और उसी के अनुसार जवाब देंगे।

दुनिया पर क्या होगा असर
होर्मुज का यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से सप्लाई होता है। इस तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल के दाम 7 प्रतिशत तक बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकते हैं।

भारत की स्थिति और सुझाव
इस संकट को देखते हुए भारत सरकार भी सतर्क हो गई है। ईरान के राजदूत ने भरोसा दिलाया है कि वे भारतीय जहाजों को सुरक्षा के साथ गुजरने में मदद करेंगे। वहीं, सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे ऊर्जा की बचत करें। लोगों को सलाह दी गई है कि वे खाना पकाने के लिए पीएनजी और इंडक्शन कुकर का ज्यादा इस्तेमाल करें ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके।

अन्य देशों की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में दुनिया के देश दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। इजरायल ने अमेरिका के इस कदम का समर्थन किया है, वहीं चीन और रूस ने इसकी आलोचना की है। दूसरी ओर, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे नाटो देशों ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है। उनका कहना है कि वे अमेरिका की इस नाकाबंदी में शामिल नहीं होंगे और उनका ध्यान सिर्फ समुद्री मार्ग को खुला रखने पर है l

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे ईरान को हथियारों की रेस से बाहर रखना चाहते हैं और उसे समझौते की मेज पर लाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर करना जरूरी समझते हैं। अमेरिका न केवल इस रास्ते से आवागमन सामान्य करना चाहता है, बल्कि ईरान के साथ अपने संयुक्त नियंत्रण को भी बढ़ाना चाहता है।