Share

3 अप्रैल 2026
लंदन/नई दिल्ली:
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए ब्रिटेन ने कमान संभाल ली है। लंदन में गुरुवार को ब्रिटेन की पहल पर एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक हुई, जिसमें भारत सहित दुनिया के लगभग 40 देशों के विदेश मंत्री शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग (समुद्री जहाजों) की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने किया। उन्होंने नई दिल्ली का रुख स्पष्ट करते हुए कहा:
कि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत इस संकट के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता है ताकि वैश्विक व्यापार पर असर न पड़े।

बैठक से अमेरिका रहा नदारद
हैरानी की बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिका शामिल नहीं हुआ। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुई है जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज को खुला रखना उन देशों की जिम्मेदारी है जो इस मार्ग पर निर्भर हैं, अमेरिका का काम सिर्फ अपने हितों की रक्षा करना है।

ब्रिटेन और चीन की तीखी प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री यवेट कूपर ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का ‘अपहरण’ कर लिया है। उन्होंने इसे ईरान की ‘लापरवाही’ करार दिया।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से फोन पर बात करते हुए चेतावनी दी कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, यह जलमार्ग स्थिर नहीं हो पाएगा। उन्होंने जल्द से जल्द युद्धविराम की मांग की है।
अगर होर्मुज का संकट जल्द हल नहीं हुआ, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें (Petrol-Diesel Prices) तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।


Share