21 अप्रैल 2026:
कब है बगलामुखी जयंती :क्यों मनाते हैं बगलामुखी जयंती:

हिंदू धर्म में देवी मां का प्रमुख स्थान बन जाता है। शास्त्रों में 10 महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिसमें से आठवीं महाविद्या होती हैं– मां बगलामुखी
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी का प्राकाट्य दिवस मनाया जाता है। यानी इस दिन मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है।  मां बगलामुखी को पीतांबरा माता भी कहा जाता है ,क्योंकि इन्हें पीला रंग बहुत प्रिय होता है।

शुभ मुहूर्त:
हिंदू पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 23 अप्रैल को रात 8:49 से प्रारंभ होकर 24 अप्रैल  को शाम 7:21 तक रहेगी।
जिस कारण उदया तिथि के हिसाब से 24 अप्रैल को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाएगी।

पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 4:19 से 5:03 तक है जिसे ब्रह्म मुहूर्त कहा जाएगा।
इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त 11:53 से दोपहर 12:46 तक रहेगा।

मां बगलामुखी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण:
मां बगलामुखी को अष्ट महाविद्या के रूप में ब्रह्मास्त्र विद्या भी कहा जाता है । ऐसी मान्यता है की मां की आराधना से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
यानी मां बगलामुखी की पूजा अर्चना से शत्रु दोष समाप्त होता है। जीवन में आ रही बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।

मां बगलामुखी के प्रमुख शक्तिपीठ:
24 अप्रैल मां बगलामुखी की जयंती पर प्रसिद्ध शक्तिपीठ नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर ,पीतांबरा पीठ दतिया और वनखंडी बगलामुखी मंदिर में भव्य अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इस दिन सभी लोग विशेष रूप से माता का आशीर्वाद लेने के लिए इन मंदिरों में पहुंचते हैं।
पूजा विधि:
मां बगलामुखी की पूजा अर्चना हेतु सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान से निवृत हो ,स्वच्छ साफ कपड़े धारण कर व्रत का संकल्प लें। इस दिन पीले रंग के कपड़े अवश्य पहनने चाहिए और पूजा में भी पीले रंग की सामग्री अर्पित करना चाहिए।
पूजन के लिए एक चौकी में पीला कपड़ा बिछाकर ,मां बगलामुखी की तस्वीर या कोई यंत्र स्थापित कर पूजा की तैयारी करें।
पूजा की सामग्री में पीले फूल ,पीले चंदन, हल्दी ,अक्षत और पीले फल अर्पित करें।
मां के भोग के लिए बेसन के लड्डू ,केसरिया हलवा या पीले चावल का भोग अवश्य चढ़ाएं।
विधि विधान से माता की पूजन के बाद मां बगलामुखी के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए।
हल्दी की माला से मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप करें तो अत्यंत फलदाई होता है।
मां बगलामुखी के बीज मंत्र है-

“ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।”

यह मंत्र शत्रुओं की बुद्धि और वाणी को  रोकने के लिए माँ पीताम्बरा देवी को समर्पित है।