*उत्तर प्रदेश के सतुआ बाबा का 50 करोड़ का आश्रम: कौन हैं संतोष दास और कैसे बने ‘सतुआ बाबा’?*
संवाददाता
21 January 2026
अपडेटेड: 3:01 PM 0stGMT+0530
उत्तर प्रदेश में इन दिनों सतुआ बाबा चर्चा का विषय बने हुए हैं। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर करोड़ों रुपये की संपत्ति और भव्य आश्रम तक का उनका सफर लोगों के बीच जिज्ञासा और बहस दोनों का कारण बन गया है। सतुआ बाबा का असली नाम संतोष दास बताया जाता है, जिन्होंने कम उम्र में सांसारिक जीवन त्यागकर सन्यास का मार्ग अपनाया।
*बचपन से सन्यास तक का सफर*
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संतोष दास ने किशोरावस्था में ही घर छोड़ दिया था। वे वाराणसी पहुंचे और वहां एक प्राचीन वैष्णव संप्रदाय से जुड़कर धार्मिक शिक्षा और साधना में लीन हो गए। गुरु- शिष्य परंपरा के तहत उन्होंने शास्त्रों का अध्ययन किया और धीरे-धीरे धार्मिक जगत में पहचान बनाई। समय के साथ उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि मिली और वे एक बड़े आध्यात्मिक समूह के प्रमुख बने।
*50 करोड़ रुपये का आश्रम*
सतुआ बाबा का वाराणसी क्षेत्र में स्थित आश्रम अब काफी चर्चित हो चुका है। विभिन्न आकलनों के अनुसार इस आश्रम की कुल संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये मानी जा रही है। आश्रम में विशाल परिसर, आधुनिक सुविधाएं, अतिथि भवन और आयोजन स्थल शामिल हैं। यहां धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, भंडारे और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। दावा किया जाता है कि आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को निशुल्क भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी जाती है।
हाल के वर्षों में सतुआ बाबा की पहचान केवल आध्यात्मिक नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि उनकी लग्जरी जीवनशैली को लेकर भी बनी है। धार्मिक आयोजनों में उन्हें महंगी गाड़ियों के काफिले के साथ देखा गया, जिससे सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। समर्थकों का कहना है कि ये सभी संसाधन आश्रम और दानदाताओं के माध्यम से आते हैं और इनका उपयोग धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है, जबकि आलोचक इसे संत जीवन के मूल सिद्धांतों के विपरीत मानते हैं।
सतुआ बाबा का संबंध कई प्रभावशाली संतों और सार्वजनिक हस्तियों से भी जोड़ा जाता है। बड़े धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक स्तर पर उनकी स्वीकार्यता उन्हें एक प्रभावशाली धार्मिक व्यक्तित्व बनाती है। इससे उनकी लोकप्रियता और प्रभाव क्षेत्र दोनों में वृद्धि हुई है।
सतुआ बाबा को लेकर समाज में मत विभाजित नजर आते हैं। कुछ लोग उन्हें आधुनिक दौर का प्रभावशाली संत मानते हैं, जो धर्म को संगठित रूप दे रहे हैं, जबकि कुछ लोग आश्रम की संपत्ति और जीवनशैली पर सवाल उठाते हैं। बावजूद इसके, उनके अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनका आश्रम धार्मिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन चुका है।
संतोष दास से सतुआ बाबा बनने तक की यात्रा साधना, संगठन और विवादों से होकर गुजरती है। 50 करोड़ रुपये के आश्रम और भव्य व्यवस्थाओं के साथ सतुआ बाबा आज उत्तर प्रदेश के चर्चित धार्मिक चेहरों में शामिल हैं। उनका जीवन यह दिखाता है कि आधुनिक दौर में आध्यात्मिक नेतृत्व किस तरह नए रूप और नई पहचान के साथ सामने आ रहा है l