पोषण आहार घोटाले में जांच जारी, लोकायुक्त को नहीं मिल रही पूरी जानकारी
संवाददाता
26 February 2026
अपडेटेड: 4:45 PM 0thGMT+0530
26 फरवरी 2026
भोपाल:आठ साल बाद भी जाँच लंबित, लोकायुक्त ने मांगी पूरी जानकारी
पोषण आहार और टेकहोम राशन घोटाले को लेकर चल रही जांच में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। लोकायुक्त संगठन में पिछले आठ वर्षों में 37 हजार 967 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से केवल 3716 मामलों में ही जांच प्रकरण दर्ज हो पाए हैं। लोकायुक्त को समय पर तथ्य और दस्तावेज नहीं मिलने से जांच की गति प्रभावित हो रही है।
पूर्व मुख्य सचिव और मिशन अधिकारियों पर आरोपों की पड़ताल
मामले में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन के खिलाफ जांच चल रही है। शिकायतों में दोनों अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फरवरी 2025 में लोकायुक्त में इनके खिलाफ जांच प्रकरण दर्ज किए गए थे, लेकिन कई मामलों में अभी तक आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं हो सके हैं।
विधानसभा में उठा मुद्दा, मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि इकबाल सिंह बैंस और ललित मोहन के खिलाफ जांच लोकायुक्त में जारी है और वर्ष 2025 में 12 अगस्त तथा इसके बाद 28 नवंबर और 2026 तक 5 फरवरी को जांच आगे बढ़ाई गई है।
लोकायुक्त की नाराजगी, विभागीय अधिकारियों पर टिप्पणी
लोकायुक्त के विधिक सलाहकार जसवंत सिंह यादव ने पंचायत विभाग की एसीएस दीपाली रस्तोगी, सचिव जी वी रश्मि और आजीविका मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह को पत्र लिखकर पोषण आहार के क्रियान्वयन को लेकर कैग द्वारा 2022 में की गई टिप्पणी से संबंधित जानकारी 13 अप्रैल तक आवश्यक रूप से उपलब्ध करवाने को कहा है l
मामले में विभाग के कई अन्य अधिकारी, आपूर्तिकर्ता और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर बड़ी मात्रा में सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। इससे जुड़े कई मामलों में अलग-अलग एजेंसियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
हाईकोर्ट में भी लंबित हैं कई प्रकरण
इस घोटाले से जुड़े 1106 प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित बताए गए हैं। वर्ष 2007 से शुरू हुए मामलों में अब तक 979 आपराधिक प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। जनवरी 2026 तक कई शिकायतों पर कार्रवाई जारी है, जिससे यह मामला लंबे समय तक चलने की संभावना जताई जा रही है।
भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
सरकार ने कहा है कि घोटाले में शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और खरीद प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।