पूर्वोत्तर में बडी साजिश का खुलासा: आतंकियों को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई कर रहे यूक्रेनी  और अमेरिकी

khabar pradhan

संवाददाता

18 March 2026

अपडेटेड: 1:25 PM 0thGMT+0530

पूर्वोत्तर में बडी साजिश का खुलासा: आतंकियों को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई कर रहे यूक्रेनी  और अमेरिकी

18 मार्च 2026
नई दिल्ली l विदेशी साजिश का खुलासा
पूर्वोत्तर भारत में आतंकी गतिविधियों से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि विदेशी नागरिकों का एक समूह संगठित तरीके से आतंकियों को ट्रेनिंग देने और उन्हें तकनीकी सहायता पहुंचाने में शामिल था।

विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी

इस मामले में अब तक सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके सात अन्य साथियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों को 27 मार्च तक NIA की हिरासत में रखा गया है, जहां उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।

कहां से हुई गिरफ्तारी

जांच एजेंसियों के अनुसार, एक अमेरिकी नागरिक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली के हवाई अड्डों से पकड़ा गया। सभी आरोपी अलग-अलग समय पर भारत पहुंचे थे।

वीजा पर आए, बिना अनुमति पहुंचे संवेदनशील क्षेत्रों में

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये सभी विदेशी नागरिक वैध पर्यटक वीजा लेकर भारत आए थे, लेकिन बिना अनुमति पूर्वोत्तर राज्यों और म्यांमार के संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच गए। यह सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।

आतंकियों को दी जा रही थी ट्रेनिंग

NIA के मुताबिक, ये विदेशी नागरिक म्यांमार में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को ड्रोन संचालन, हथियारों के इस्तेमाल और जमीनी युद्ध (गुरिल्ला तकनीक) की ट्रेनिंग दे रहे थे। इससे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

ड्रोन सप्लाई का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया है कि मिजोरम के रास्ते ड्रोन की कई खेप उग्रवादी संगठनों तक पहुंचाई गई। इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमलों के लिए किया जा सकता था, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।

मुख्य आरोपी का बैकग्राउंड

गिरफ्तार आरोपियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। वह खुद को एडवेंचरिस्ट से डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता बता चुका है और पहले भी कई संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रहा है।

लीबिया और सीरिया से जुड़ा रहा है संबंध

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैथ्यू वैन डाइक 2011 में लीबिया गया था, जहां वह कर्नल गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ शामिल हो गया। इस दौरान उसे त्रिपोली की अबू सलीम जेल में करीब छह महीने तक कैद भी रखा गया था। बाद में वह सीरिया के अलेप्पो में भी संघर्ष के दौरान सक्रिय रहा।

विद्रोहियों से संपर्क और सलाहकार की भूमिका

बताया जा रहा है कि वह डॉक्यूमेंट्री बनाने के नाम पर विद्रोही समूहों से संपर्क करता था और धीरे-धीरे उनका सलाहकार बन गया। इससे उसकी भूमिका सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित न रहकर रणनीतिक सहयोग तक पहुंच गई।

म्यांमार कनेक्शन और सीमा पार गतिविधियां

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि कुछ आरोपी अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर म्यांमार पहुंचे और वहां उग्रवादी संगठनों के साथ मिलकर काम किया। यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने संबंधित देशों के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं, यूक्रेन की ओर से अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर जानकारी मांगी गई है, जबकि अमेरिकी दूतावास ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

जांच जारी, नेटवर्क की तलाश तेज

फिलहाल NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस अंतरराष्ट्रीय साजिश में और कौन-कौन शामिल है।

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