नेपाल में सत्ता परिवर्तन होते ही पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व मंत्री हिरासत में:
संवाददाता
28 March 2026
अपडेटेड: 10:01 PM 0thGMT+0530
28 मार्च 2026 :
नेपाल काठमांडू:
ओली पर की गई कार्रवाई:
बालेंद्र शाह के नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद
नेपाल की राजनीति में जबरदस्त हलचल है । बालेन शाह ने पीएम बनते ही पूर्व PM केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार किया फिर पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक भी पकड़े गए। तो बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री बनते ही फुल एक्शन में दिखाई दे रहे हैं।
जांच आयोग ने सिफारिश की थी कि पूर्व PM केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक के खिलाफ राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत मामला चलाया जाना चाहिए। इन धाराओं में आपराधिक लापरवाही का गंभीर आरोप शामिल है. । इस मामले में उन पर ऐसे कानूनों के तहत आरोप लग सकते हैं, जिनमें 10 साल तक की सजा हो सकती है। अब तक जो मीडिया रिपोर्ट्स मिल रहीं हैं उसके मुताबिक, दोनों नेताओं को उनके घरों से हिरासत में लिया गया। गृह मंत्रालय की आधिकारिक शिकायत के बाद पूरी जांच की गई उसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। एक जांच आयोग ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस आयोग का नेतृत्व किया था पूर्व स्पेशल कोर्ट जज गौरी बहादुर कार्की ने शिकायत में साफ साफ कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर लापरवाही हुई थी जिसके कारण कई लोगों की जान गई।
जांच में ये भी सामने आया कि अधिकारियों को पहले से हिंसा ज्यादा बढ़ने की जानकारी थी, लेकिन समय पर सही कदम नहीं उठाए गए. इसी वजह से प्रदर्शन के दौरान 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। इधर द काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक, नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लिया गया. इसके बाद ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. गिरफ्तारी से पहले काठमांडू घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. पुलिस ने कार्रवाई से पहले कानून मंत्रालय से लिखित इजाजत भी ली थी। प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता मे कैबिनेट मीटिंग मे इस रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया गया और उसके तुरंत बाद… पुलिस हरकत में आ गई। यानी इरादे साफ हैं और संदेश भी ।
गिरफ्तारी के बाद दोनों नेताओं को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया और अब उन्हें आर्म्ड पुलिस फोर्स की महाराजगंज बटालियन में शिफ्ट करने की तैयारी है कस्टडी की प्रक्रिया जारी है और सुरक्षा भी हाई अलर्ट पर है ।
इधर इस कार्रवाई ने नेपाल की राजनीति को दो हिस्सों में बांट दिया है।
एक तरफ जवाबदेही की मांग… दूसरी तरफ इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताने वाले स्वर…लेकिन बड़ा सवाल अब भी वही है। क्या ये कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है… या सिस्टम में गहराई तक बदलाव की आहट ।
क्योंकि जिस Gen-Z आंदोलन ने ओली सरकार गिरा दी… वही अब न्याय की मांग पर अड़ा है… और नई सरकार के लिए ये पहला इम्तिहान भी…किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं ।बहरहाल नेपाल में सत्ता बदल चुकी है, इरादे भी बदलते दिख रहे हैं, बहरहाल नेपाल में बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनते ही बड़ी कार्रवाई देखने को मिली।