18 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट रखने के गंभीर आरोपों की टिप्पणी करने और आरोप लगाने के मामले में घिरे खेड़ा को अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा देने या किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। साथ ही उन पर एक से ज्यादा पासपोर्ट रखने और विदेश में संपत्ति छिपाने के आरोपों लगाये थे l इस मामले में खेड़ा पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले उन्हें जो अंतरिम राहत दी थी, उसे अब वापस लेने और उनकी अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज करने का आदेश दिया है।
अदालत में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा के वकील मनु सिंघवी ने अदालत से अपील की कि उनकी अंतरिम जमानत की अवधि मंगलवार तक बढ़ा दी जाए, ताकि वे असम की संबंधित अदालत में जाकर अपनी बात रख सकें। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
अदालत ने खेड़ा को संबंधित निचली अदालत में जाकर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने को कहा है।
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस वेंकटेश की पीठ ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले का फैसला मेरिट (तथ्यों) के आधार पर करेंगे।
कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर भी रोक लगाने से मना कर दिया है।
विपक्ष और कानूनी अड़चनें
अदालत ने सुनवाई के दौरान उन दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए जो याचिका के साथ लगाए गए थे। कोर्ट का मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पवन खेड़ा को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा और संबंधित राज्य की अदालत में ही अपनी अर्जी लगानी होगी।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अब उन्हें राहत पाने के लिए असम की अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।


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