27 अप्रैल 2026
इंदौर:
इंदौर शहर में इन दिनों एक बहुत ही चिंताजनक खबर सामने आ रही है। शहर के नामी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चे अब खतरनाक एमडी (MD) ड्रग्स के जाल में फंसते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 12 से 16 साल की उम्र के किशोर इस लत का शिकार बन रहे हैं। हर महीने मनोचिकित्सकों के पास ऐसे 5 से 6 नए मामले पहुंच रहे हैं, जो समाज और अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
नशे की शुरुआत कैसे होती है?
अक्सर बच्चे दोस्तों के दबाव में आकर या केवल जिज्ञासा (क्यूरियोसिटी) के कारण पहली बार ड्रग्स ट्राई करते हैं। उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक बार की बात है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत एक गंभीर लत में बदल जाती है। चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चे अब स्कूल बैग में या लंच ब्रेक के दौरान भी इन नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने लगे हैं। कुछ बच्चे तो गुलाबी रंग की एमडी ड्रग्स की पुड़िया साथ रखते हैं और पार्टियों में शराब के साथ इसका सेवन कर रहे हैं।
केस स्टडीज: बच्चों का बदलता व्यवहार
अखबार में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि यह नशा बच्चों को कैसे प्रभावित कर रहा है:
1. विजयनगर क्षेत्र का एक होनहार छात्र अचानक पढ़ाई छोड़कर देर रात तक जागने लगा। जांच में पता चला कि वह दोस्तों के कहने पर एमडी ड्रग्स लेने लगा था।
2. पलासिया की एक 15 वर्षीय छात्रा ने दोस्तों के साथ पार्टियों में ड्रग्स लेना शुरू किया। कुछ ही महीनों में उसका वजन काफी कम हो गया और उसे नींद न आने की समस्या होने लगी।
3. एक 13 साल के बच्चे के स्कूल बैग से सफेद पाउडर का पैकेट मिला। पूछने पर उसने बहाना बनाया कि वह फेस पाउडर है, लेकिन जांच में वह ड्रग्स निकला।
4. भंवरकुआं क्षेत्र के एक छात्र के घर से पैसे गायब होने लगे। जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने कबूल किया कि नशे की जरूरत पूरी करने के लिए वह घर से पैसे चुरा रहा था।
माता-पिता के लिए चेतावनी के संकेत
मनोचिकित्सक डॉ. कौस्तुभ बागुल और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर आपके बच्चे के व्यवहार में नीचे दिए गए बदलाव दिखें, तो तुरंत सतर्क हो जाएं:
* बच्चा अचानक चुप रहने लगे या बहुत ज्यादा आक्रामक (गुस्सैल) हो जाए।
* पढ़ाई और पुराने शौक से उसका मन हट जाए।
* आंखों का अक्सर लाल रहना।
* घर से अचानक पैसे गायब होना।
* नए और संदिग्ध दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताना।
* ड्रग्स लेने के बाद बच्चा घर लौटकर बहुत देर तक सोता रहे।
प्रदेश में बढ़ता नेटवर्क
रिपोर्ट्स के अनुसार, एमडी ड्रग्स का निर्माण मध्य प्रदेश के ही मंदसौर, नीमच और जावरा जैसे इलाकों में हो रहा है। यहां से यह ड्रग्स इंदौर, रतलाम, देवास और उज्जैन जैसे शहरों में सप्लाई की जा रही है। यह ड्रग्स पूरी तरह केमिकल से बनाई जाती है, जो शरीर और दिमाग के लिए किसी जहर से कम नहीं है।
डीएसपी संतोष हाडा और क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी का कहना है कि पुलिस और नारकोटिक्स विभाग लगातार ड्रग तस्करों पर नजर रख रहे हैं और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। लेकिन इसके साथ ही शिक्षकों और माता-पिता को भी जागरूक होना पड़ेगा। अगर बच्चों में कोई भी असामान्य व्यवहार दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत एक्सपर्ट की सलाह लें।
यह समस्या अब केवल बाहर की नहीं, बल्कि घर और स्कूल तक पहुंच चुकी है। बच्चों को इस दलदल से बचाने के लिए उनसे खुलकर बात करना और उनके दोस्तों के बारे में जानकारी रखना बहुत जरूरी है।


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