28 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
मशहूर भारतीय टेक कंपनी ‘जोहो’ (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेंबू ने अमेरिका में रह रहे भारतीय पेशेवरों के नाम एक भावुक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से स्वदेश वापस लौटने की अपील की है और कहा है कि अब समय आ गया है कि वे अपनी प्रतिभा और अनुभव का इस्तेमाल भारत को आगे बढ़ाने में करें।
सोशल मीडिया पर साझा किया ‘खुला पत्र’
श्रीधर वेंबू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर यह पत्र साझा किया। उन्होंने लिखा, “कृपया घर लौट आएं। भारत माता को आपकी प्रतिभा की जरूरत है। भारत की तकनीकी ताकत को बढ़ाने में मदद करें।” उन्होंने आगे कहा कि भारत की युवा आबादी को सही रास्ता दिखाने के लिए उन अनुभवी लोगों की जरूरत है, जिन्होंने विदेशों में तकनीक के क्षेत्र में बड़ा काम किया है।
अमेरिका में बदल रहे हालात पर जताई चिंता
वेंबू ने अपनी इस अपील में अमेरिका में भारतीयों के सामने आ रही चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कुछ प्रमुख बातें कही हैं:
* अमेरिका में भारतीय अब एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। वहां कुछ कट्टरपंथी समूह अब भी भारतीयों को बाहरी मानते हैं।
* वहां एक बड़ा वर्ग यह मानने लगा है कि भारतीयों ने अपनी सफलता अनुचित तरीकों से हासिल की है।
* अमेरिका में बढ़ता राजनीतिक ध्रुवीकरण भारतीयों की सुरक्षा और सम्मान के लिए स्थायी समाधान नहीं है।
* वहां के नए नियमों और एच-1बी (H-1B) वीजा को लेकर बढ़ती सख्ती ने भी पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है।
अपनी पुरानी यादें कीं ताजा
वेंबू ने पत्र में 37 साल पहले के अपने दिनों को याद किया जब वे खुद अमेरिका गए थे। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके पास पैसे तो नहीं थे, लेकिन भारत की अच्छी शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत उनके साथ थी। उन्होंने कहा कि आज जो सम्मान दुनिया भर में भारतीयों को मिलता है, वह देश की समृद्धि और सुरक्षा पर निर्भर करता है, और इसके लिए तकनीक का मजबूत होना जरूरी है।
क्यों खास है यह अपील?
यह पहली बार नहीं है जब श्रीधर वेंबू ने ऐसी बात कही हो। वे खुद भी अमेरिका छोड़कर भारत लौट आए थे और अब तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से अपनी अरबों डॉलर की ग्लोबल सॉफ्टवेयर कंपनी चला रहे हैं। उनका मानना है कि भारत का भविष्य निर्माण तभी संभव है जब यहां के प्रतिभाशाली लोग वापस आकर जमीनी स्तर पर काम करें।
जोहो और श्रीधर वेंबू: गाँव से ग्लोबल टेक कंपनी चलाने की मिसाल
श्रीधर वेंबू केवल बातें ही नहीं करते, बल्कि उन्होंने खुद इसे जीकर दिखाया है। 2019 में वे अमेरिका के कैलिफोर्निया की चकाचौंध छोड़कर तमिलनाडु के एक छोटे से गाँव तेनकासी में बस गए। आज वे वहीं से लुंगी और शर्ट पहनकर अपनी अरबों डॉलर की कंपनी ‘जोहो’ चला रहे हैं।
गाँवों को टेक हब बनाने की पहल:
रूरल रिवाइवल: वेंबू का मानना है कि सारी नौकरियाँ शहरों में ही क्यों हों? उन्होंने छोटे गाँवों में ऑफिस खोलकर स्थानीय युवाओं को वहीं ट्रेनिंग दी और उन्हें वर्ल्ड क्लास डेवलपर बनाया।
जोहो यूनिवर्सिटी: उनकी कंपनी डिग्री से ज्यादा हुनर (Skill) को महत्व देती है। वे उन बच्चों को भी नौकरी देते हैं जिनके पास बड़ी डिग्री नहीं है, बस काम सीखने का जज्बा है।
सादा जीवन, बड़ी सोच: दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल होने के बावजूद, श्रीधर वेंबू अक्सर साइकिल पर चलते हैं और स्थानीय बच्चों को पढ़ाते हुए नजर आते हैं।
जोहो (Zoho) क्या है?
जोहो एक भारतीय मल्टीनेशनल कंपनी है जो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और ‘क्लाउड-बेस्ड’ बिजनेस टूल्स बनाती है। इसे गूगल वर्कस्पेस (Google Workspace) का भारतीय विकल्प माना जाता है। आज दुनिया भर में लाखों कंपनियां अपने कामकाज के लिए जोहो के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती हैं।
श्रीधर वेंबू का यह मॉडल दिखाता है कि अगर नियत साफ हो, तो भारत के छोटे से छोटे गाँव से भी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी को टक्कर दी जा सकती है।


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