5 मई 2026

कोलकाता:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस के किले को पूरी तरह ढहा दिया है। इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर नंदीग्राम और भवानीपुर से आई है, जहाँ भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक बार फिर ममता बनर्जी को करारी शिकस्त देकर खुद को राजनीति का ‘जायंट किलर’ साबित कर दिया है।
भवानीपुर में भी नहीं चला ममता का जादू
कोलकाता की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर इस बार पूरे देश की नजरें टिकी थीं। यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना क्षेत्र माना जाता था, लेकिन सुवेंदु अधिकारी ने यहाँ उन्हें 15,105 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया।
* सुवेंदु अधिकारी को कुल 73,917 वोट मिले।
* ममता बनर्जी को केवल 58,812 वोटों पर संतोष करना पड़ा।
सिर्फ इतना ही नहीं, सुवेंदु अधिकारी ने अपने गृह जिले पूर्व मेदिनीपुर की सभी 16 की 16 सीटों पर भाजपा को जीत दिलाकर टीएमसी का सूपड़ा साफ कर दिया है। नंदीग्राम में भी भाजपा प्रत्याशी ने टीएमसी के पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराकर अपनी ताकत दिखाई।
बिजली मंत्री से लेकर शिक्षा मंत्री तक सब हारे
ममता बनर्जी के लिए यह हार इसलिए भी ज्यादा दर्दनाक है क्योंकि उनकी सरकार चलाने वाले ‘हेवीवेट’ मंत्री अपनी साख नहीं बचा पाए। हारने वाले प्रमुख मंत्रियों में ये नाम शामिल हैं:
* अरूप विश्वास (बिजली मंत्री)
* ब्रात्य बसु (शिक्षा मंत्री)
* फिरहाद हकीम और चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे बड़े चेहरे भी अपनी सीटें नहीं बचा सके।
* इनके अलावा शोभनदेव चट्टोपाध्याय, अरूप राय और बेचाराम मन्ना जैसे दिग्गजों को भी जनता ने नकार दिया।
हालात यह थे कि विधानसभा उपाध्यक्ष और परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती जैसे नेता रात साढ़े दस बजे तक वोटों की गिनती में पिछड़ते रहे और अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
15 साल के शासन का हुआ अंत
बंगाल में पिछले 15 सालों से काबिज टीएमसी सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा साफ नजर आया। भाजपा की आंधी में न सिर्फ मुख्यमंत्री खुद अपनी सीट हारीं, बल्कि उनकी पूरी कैबिनेट के करीब एक दर्जन से अधिक मंत्री ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।
जानकारों का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी की यह जीत बताती है कि बंगाल की जनता अब पुराने चेहरों से ऊब चुकी थी और एक मजबूत विकल्प की तलाश में थी। इस हार ने टीएमसी के भविष्य और ममता बनर्जी की राजनीतिक साख पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है, वहीं टीएमसी खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। बंगाल की राजनीति अब एक नए अध्याय की शुरुआत कर रही है।