12 मई 2026

नई दिल्ली:
भारतीय सेना को और भी शक्तिशाली बनाने के लिए उसे नए स्वदेशी अत्याधुनिक हथियार सौंपे गए हैं। इन हथियारों में मुख्य रूप से वर्टिकल टेक ऑफ और लैंडिंग (VTOL) क्षमता वाले ड्रोन, ‘कामीकाजी’ ड्रोन और ‘लोइटरिंग गाइडेड म्यूनिशन’ शामिल हैं। ये सिस्टम कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जैसे ऊंचे पहाड़ों और घने शहरी इलाकों में बेहद सटीक हमला करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
प्रमुख हथियारों की खासियतें:
1. एएलएस-50 (ALS-50): पहला स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन
यह भारत का पहला स्वदेशी ‘हवा से सतह’ पर प्रहार करने वाला सिस्टम है।
इसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मिलकर बनाया है।
यह लक्ष्य को 20 किलोमीटर की दूरी तक भेद सकता है।
यह ड्रोन की तरह उड़ता है और लक्ष्य मिलते ही खुद को उससे टकराकर नष्ट कर देता है (कामीकाजी तकनीक)। यह दिन-रात और किसी भी मौसम में काम करने में सक्षम है।
2. अग्निका (Agnika) कामीकाजी ड्रोन
इसे देश का पहला वर्टिकल टेक ऑफ ड्रोन कहा जा रहा है, जिसे उड़ान भरने के लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं होती।
यह 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और लगातार 30 मिनट तक हवा में रह सकता है।
शहरी युद्ध और छोटे आतंकी ठिकानों के खिलाफ यह बेहद असरदार है। यह इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर वाले इलाकों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
सेना को क्या होगा फायदा?
इन हथियारों की मदद से सेना दुश्मन के ठिकानों पर बिना खुद को जोखिम में डाले बेहद सटीक हमले कर सकेगी।
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में ये ड्रोन निगरानी के साथ-साथ तुरंत प्रहार करने की क्षमता प्रदान करेंगे।
इन स्वदेशी प्रणालियों के सेना में शामिल होने से रक्षा क्षेत्र में विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी।
इन अत्याधुनिक प्रणालियों का सफल परीक्षण पहले ही लद्दाख और पोखरण जैसे इलाकों में किया जा चुका है, जहाँ इन्होंने अपनी मारक क्षमता और सटीकता का लोहा मनवाया है।