21 मई 2026
भोपाल:
भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में मेडिकल स्टोर्स की ऐतिहासिक तालाबंदी, पुतला दहन कर कलेक्टर को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन।
भोपाल शहर में ऑनलाइन दवा व्यापार (ई-फार्मेसी) और केंद्र सरकार की कुछ नीतियों के खिलाफ दवा व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में राजधानी की 4,000 से ज्यादा निजी दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। पुराने भोपाल के दवा बाजार से लेकर नए शहर के रिहायशी इलाकों तक मेडिकल स्टोर्स के शटर गिरे रहे, जिसके चलते शहर में करीब 20 करोड़ रुपये का दवा व्यापार प्रभावित हुआ है।
मरीजों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी
मेडिकल स्टोर्स की इस अचानक हड़ताल से सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए भटकते नजर आए। हमीदिया, एम्स, सुल्ताना और जेपी जैसे बड़े अस्पतालों के बाहर से भी मरीजों को दवाइयां नहीं मिल सकीं। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर की कीमोथेरेपी और अस्थमा के मरीजों को बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
निजी दुकानें बंद होने के कारण शहर में सिर्फ प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और कुछ चुनिंदा सरकारी अस्पतालों के अंदर के काउंटर ही खुले थे, जहाँ दवा लेने वालों की भारी भीड़ और लंबी लाइनें देखने को मिलीं। जेपी अस्पताल में पहले से ही दवाओं की कमी होने के कारण मरीजों की परेशानी दोगुनी हो गई।
व्यापारियों का गंभीर आरोप: AI से फर्जी पर्चे बनाकर मंगाई जा रही हैं नशीली दवाएं
दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि:
* आजकल की युवा पीढ़ी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए धड़ल्ले से नशीली और प्रतिबंधित दवाएं मंगा रही है।
* लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से डॉक्टरों के फर्जी पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) तैयार करते हैं और उन्हें पोर्टल पर अपलोड करके नशीली दवाएं आसानी से घर बैठे हासिल कर लेते हैं।
* कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने लोगों तक दवा पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप या ईमेल के पर्चों पर दवा देने की जो छूट दी थी, अब उसकी आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है।
केमिस्टों की मुख्य मांगें क्या हैं?
दवा विक्रेताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया, पुतला दहन किया और कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
ऑनलाइन बिक्री पर रोक: ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए, क्योंकि इससे छोटे और पारंपरिक दुकानदारों को भारी नुकसान हो रहा है।
सख्त नियम बनें: ई-फार्मेसी के लिए ऐसे कड़े नियम बनाए जाएं ताकि फर्जी पर्चों का इस्तेमाल और दवाओं का दुरुपयोग पूरी तरह रुक सके।
सस्ते डिस्काउंट पर लगाम: ऑनलाइन कंपनियां जो 20 से 50 प्रतिशत तक का भारी डिस्काउंट (प्रिडेटरी डिस्काउंट) दे रही हैं, उस पर रोक लगे ताकि छोटे और मध्यम मेडिकल स्टोर संचालकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
जीएसआर नियम वापस लें: सरकार के वर्तमान प्रावधान (जीएसआर नियम) सीधे तौर पर कॉर्पोरेट ऑनलाइन कंपनियों को फायदा पहुंचा रहे हैं। सरकार को इन नियमों को तत्काल वापस लेना चाहिए।
व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने छोटे और मध्यम दवा व्यवसायियों के हितों की रक्षा नहीं की, तो पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा, जिससे नकली और नशीली दवाओं का अवैध कारोबार और तेजी से बढ़ेगा।


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