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23 मई 2026

धार:

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार का दिन एक बेहद ऐतिहासिक पल का गवाह बना। यहाँ पूरे 721 साल बाद एक नया इतिहास रचा गया है, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला के दरवाजे हिंदू समाज के लिए सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पूरी तरह खुले रहे। इस खास मौके पर पूरा परिसर मां वाग्देवी के जयकारों से गूंज उठा।
सुबह से ही भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। सुबह से लेकर शाम तक भक्तों ने माता के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना की। दोपहर के समय यहाँ एक भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धा का एक अनोखा सैलाब देखने को मिला। इस महाआरती में 10 हजार से भी ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
भक्तों ने इस खास दिन के लिए मंदिर के गर्भगृह को सुंदर फूलों से सजाया था। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी को चुनरी अर्पित की और पूरी श्रद्धा के साथ अपनी पूजा संपन्न की। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए कई खास लोग भी पहुंचे थे, जिनमें भोजशाला मामले से जुड़े मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल, कुलदीप तिवारी और उनके साथ सह-याचिकाकर्ता भी मौजूद रहे। इसके अलावा प्रसिद्ध संत मुरारी बापू ने भी यहाँ पहुंचकर मां वाग्देवी के दर्शन किए।
महिलाओं और बच्चों में दिखा गजब का उत्साह
भोजशाला के भीतर शुक्रवार को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति मिलने से हिंदू समाज, खासकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। मातृशक्ति ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सहभागिता निभाई।
कई महिलाएं तो अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर मां वाग्देवी के दर्शन करने भोजशाला पहुंची थीं। परिसर के अंदर महिलाएं भक्ति गीतों पर झूमती और नाचती नजर आईं। पूरा भोजशाला परिसर जय श्री राम और मां वाग्देवी के गगनभेदी जयकारों से गूंज रहा था।
वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं का कहना था कि यह दिन उनके लिए बेहद भावुक करने वाला है। एक लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद उन्हें शुक्रवार को अखंड पूजा और महाआरती करने का यह ऐतिहासिक अवसर मिला है, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।


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