29 जून 2026/देश दुनिया/
देश में अवैध घुसपैठ को लेकर केंद्र सरकार अब और अधिक व्यापक और समन्वित कार्रवाई करने जा रही है ।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस संबंध में राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है ।
इस बैठक का उद्देश्य केवल सीमाओं की निगरानी तक नहीं रहेगा , बल्कि अवैध घुसपैठ से जुड़े पूरे तंत्र की पहचान और उसे पर त्वरित कार्रवाई के लिए साझा रणनीति तैयार करना होगा ।
सरकारी स्तर पर यह माना जा रहा है कि घुसपैठ की चुनौती केवल सीमा पर प्रवेश तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इसके बाद लोगों के विभिन्न राज्यों और शहरों तक पहुंचने, पहचान छुपाने और स्थानीय स्तर पर नेटवर्क बनाने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
अब ऐसे में कार्रवाई का दायरा अधिक व्यापक बनाया जा रहा है ।
बैठक में निम्न मुद्दों पर होगी चर्चा
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो सकती है
जिनमें मुख्य रूप से राज्यों में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की प्रक्रिया
1.राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय-
2.डाटा और सूचना साझा करने की व्यवस्था-
3.सीमा पार क्षेत्र से लेकर महानगरों तक निगरानी तंत्र को मजबूत करना-
4.दस्तावेजों और पहचान संबंधी जांच व्यवस्था को अत्यधिक प्रभावी बनाना-
5.अवैध प्रवेश को सहयोग देने वाले नेटवर्क की पहचान करना-
सरकार का फोकस अब केवल सीमाओं को मजबूत करने तक ही सीमित नहीं है ।चर्चा इस बात पर भी होगी कि अवैध प्रवेश के बाद लोगों के रहने, रोजगार, दस्तावेज अन्य प्रकार का सहयोग किस प्रकार मिलता है ,और ऐसे नेटवर्क पर किस तरह रोक लगाई जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्यवाही में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, खुफिया एजेंसी और तकनीकी निगरानी तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । इसलिए राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को भी प्राथमिकता दी जा रही है । क्योंकि कानून व्यवस्था राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इस अभियान की सफलता काफी हद तक राज्यों की भागीदारी और सहयोग पर निर्भर करेगी । बैठक में राज्यों के अनुभव और स्थानीय चुनौतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है । बैठक के बाद आने वाले समय में पहचान सत्यापन और समन्वित कार्रवाई को लेकर कार्य योजना बनाई जा सकती है । सरकार का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर अधिक प्रभावी निगरानी तंत्र को विकसित करना बताया जा रहा है।


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