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8 जुलाई 2026

नई दिल्ली:
जिस एथेनॉल को भारत का भविष्य बताया जा रहा था ,क्या अब वही रास्ता बदलने वाला है। तेल सस्ता हो रहा है, इलेक्ट्रिक गाड़ियां बढ़ रही हैं, इलेक्ट्रिक गाड़ियां  सजेस्ट की जा रही हैं ,तो क्या एथेनॉल की जरूरत खत्म होने वाली है । कुछ समय पहले तक भारत में पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने पर जोर दिया जा रहा था । हर जगह बस एथेनॉल की बात हो रही थी।
इसकी सबसे बड़ी वजह बती जा रही थी ईरान युद्ध । क्योंकि उस समय डर था कि अगर कच्चे तेल की सप्लाई रुक गई, तो भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश को बड़ी परेशानी हो सकती है । इसलिए एथेनॉल को पेट्रोल का मजबूत विकल्प माना जाने लगा । इसी सोच के तहत भारत में E20, यानी 20% एथेनॉल वाला पेट्रोल शुरू किया गया ।  आगे E25, E85 और यहां तक कि E100 यानी 100% एथेनॉल की भी चर्चा होने लगी। लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं रहे । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैंऋक्ष जो तेल कुछ समय पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, वह अब करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। वजह यह है कि दुनिया में तेल की सप्लाई फिर बढ़ रही है।  यूएई, रूस और दूसरे देशों से ज्यादा तेल बाजार में आ रहा हैक्ष।क्ष अगर आने वाले समय में तेल और सस्ता होता है, तो पेट्रोल की लागत भी कम हो सकती है । एथेनॉल को लेकर लोगों की शिकायतें भी बहुत हैं। कहा जा रहा है उनकी गाड़िया खराब हो रही हैं औऱ सीधा सीधा नितिन गडकरी को घेरा जा रहा है ।

इस पर राजनीति भी खूब हो रही है ।  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि E20 पेट्रोल को लेकर कई गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं । एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण एक भी कार में कोई समस्या नहीं आई है । 
आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल इस मामले को लेकर जनता के बीच:

अब इस बहस के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पेट्रोल पंप और सर्विस सेंटर में जनता के बीच जाने की बात कर रहे हैं ।  वो इस 20 प्रतिशत एथनॉल वाले पेट्रोल पर जनता से राय लेंगे. उन्होंने तीन कंपनियों मारूति, टॉयोटा और हिरो को अलग से चिट्ठी लिखी है और 26 को अलग से. इन तीनों ने सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि नुकसान नहीं होता, 3-4 फीसदी ही माइलेज का नुकसान होता है तो इनसे पूछा है कि अगर किसी ग्राहक का 10-15 फीसदी माइलेज घटता है या इंजन को नुकसान पहुंचता है तो उसे कवर करेंगे? बाकी 26 वाहन निर्माता कंपनियों से पूछा है कि क्या आपकी गाड़ियों में E-20 पेट्रोल से माइलेज या इंजन का नुकसान तो नहीं है, अगर ऐसा होता है तो उनको कौन कंपनसेशन देगा ।   E20 में ज्यादा एथनॉल होने से रबर के पार्ट्स खराब हो सकते हैं. ARAI की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. नुकसान होता है या नहीं? इशे लेकर लगातार बहस जारी है । इधर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। भारत में भी मई और जून के दौरान नई गाड़ियों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 11% से ऊपर पहुंच गई ।  दिल्ली सरकार भी आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है । दुनिया के कई देशों में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है ।  चीन में आधे से ज्यादा नई गाड़ियां इलेक्ट्रिक हैं। वहीं नेपाल जैसे देश में नई बिकने वाली करीब छिहत्तर% गाड़ियां इलेक्ट्रिक हैं । यानी दुनिया धीरे-धीरे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बढ़ रही है । ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर पेट्रोल सस्ता हो जाए और इलेक्ट्रिक गाड़ियां तेजी से बढ़ें, तो क्या एथेनॉल की जरूरत पहले जैसी रहेगी ।  एक और बात यह भी है कि फिलहाल तेल कंपनियां एथेनॉल को करीब  इकहत्तर रुपये प्रति लीटर की कीमत पर खरीद रही हैं । अगर पेट्रोल इससे सस्ता पड़ने लगे, तो एथेनॉल मिलाना महंगा साबित हो सकता है। साथ ही एथेनॉल वाले ईंधन में माइलेज भी थोड़ा कम माना जाता है । हालांकि एथेनॉल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता कम होती है और किसानों को भी नया बाजार मिलता है। लेकिन बदलते हालात में अब इसकी उपयोगिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है । अब बड़ा सवाल यही है । क्या आने वाले समय में भारत एथेनॉल पर उतना ही जोर देगा, या फिर इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सस्ते कच्चे तेल के बीच नई ऊर्जा नीति बनेगी ।


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