27 जुलाई  2026:
मध्य प्रदेश/ भोपाल:

कायस्थ समाज की अग्रणी संस्था कायस्थम मध्य प्रदेश द्वारा पार्श्व गायक स्व. मुकेश चंद्र माथुर के 103वें जन्मदिवस के मौके पर  रविवार को  फिल्मी गीतों के कार्यक्रम रिमझिम गिरे सावन 2.0 में मुकेश सहित किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, आशा भोसले  के गीतों की जोरदार बारिश हुई।   कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आबकारी आयुक्त श्री दीपक सक्सेना  तथा विशेष  अतिथि म.प्र.  कौंसिल  ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के महानिदेशक श्री अनिल कोठारी, वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव और प्रसिद्ध भजन गायक श्री रवि खरे रहे । अतिथियों  ने  कार्यक्रम  का  शुभारंभ  श्री  चित्रगुप्त, सरस्वती  देवी  और स्व .मुकेश के चित्र  पर माल्यार्पण   तथा  दीप  प्रज्वलित  कर  किया गया । उन्होंने  सभी  30 चित्रांश गायकों  का  स्वागत भी किया। कान्वेंट स्कूल  ईदगाह की छात्रा वंशिका श्रीवास्तव ने सरस्वती  वंदना तो इटली से आई एक छात्रा रिया सक्सेना ने भगवान श्री  चित्रगुप्त  के मंत्र का वाचन  किया। इन दोनों  छात्राओं को कायस्थम की ओर से  सम्मानित भी किया गया।


रिमझिम  गिरे  सावन आयोजन  समिति  की  ओर से  महासचिव डा. रश्मि  सक्सेना, राकेश रायजादा,संजय खरे ,रत्ना खरे,उमंग खरे ने अतिथियों का स्वागत किया तो अध्यक्ष प्रलय श्रीवास्तव,उपाध्यक्ष आर.पी.श्रीवास्तव ,सुरेश श्रीवास्तव, अजय कुमार श्रीवास्तव (NHDC) ने मुख्य अतिथि श्री  दीपक सक्सेना, विशेष  अतिथि श्री अनिल कोठारी,श्री महेश श्रीवास्तव और श्री रवि खरे को स्मृति चिन्ह भेंट किए। अतिथियों की ओर से श्री महेश श्रीवास्तव  ने  स्व. मुकेश  को स्वर सम्राट बताया । जिन्होंने 50 और 60 के दशक में  आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और  चुनौतियों को अपने गीतों के माध्यम  से प्रस्तुत किया था।
श्री महेश  श्रीवास्तव ने कहा कि गीत- संगीत की साधना के लिए कठिन तप  करना पड़ता है।

गूंजे मुकेश के बेहतरीन नगमें:
सावन का महीना पवन करें शोर..
जीना यहाँ, मरना यहाँ, इसके सिवा जाना कहाँ…
कायस्थम के  रिमझिम गिरे सावन में लगभग 30 चित्रांश गायकों ने प्रसिद्ध गायकों के  लगभग 42 लोकप्रिय फिल्मी गीत प्रस्तुत कर स्व. मुकेश  को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सावन  की  फुहारों  और  बारिश के मौसम के अनुकूल गीत  संगीत की  महफिल में  लगभग 17 गाने तो केवल स्व. मुकेश को समर्पित किए  गए। उनके द्वारा  गाए गए लोकप्रिय फिल्मी गीत  सावन का महीना पवन करें शोर…डॉ. यू. डी.सक्सेना और उनकी धर्मपत्नी डॉ. स्मिता सक्सेना ने प्रस्तुत किया, श्री  के.के.  सहाय  ने  1949  अंदाज  फिल्म  के मुकेश का  गीत “झूम  झूम  के  नाचो आ गायो..  गीत  खुशी  के…तो  हरियाली और रास्ता फिल्म में मुकेश द्वारा गाए गए “इप्तदाये इश्क में हम सारी रात जागे”…  डॉ. राजेश ब्यौहार और डॉ. विजया ब्यौहार ने प्रस्तुत किया, जिसको जनता ने बेहद पसंद किया। इसी तरह  मिलन फिल्म के  “हम तुम युग- युग से ये गीत मिलन के गाते रहेंगे”… गाकर हर्षवर्धन श्रीवास्तव, डॉ. ज्योत्स्ना श्रीवास्तव ने  मुकेश और लता जी की याद ताजा कर दी। मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के  “ये पर्वतों के दायरे, ये शाम का धुआं”… रत्ना खरे और राकेश रायजादा ने प्रस्तुत किया तो मोहम्मद रफी और आदमी फिल्म  के महेंद्र कपूर  के गीत “कैसी हँसी आज बाहरों की रात है”…को दो भाईयों अवनीश रायजादा व प्रदीप रायजादा  द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली।
गंगूबाई कठियावाड़ी फिल्म का प्रसिद्ध गाना  “मेरी जान ,मेरी जान, मेरी जान आई है यह रात नशीली”… सीमा सरन और मुकेश के द्वारा शबनम फिल्म के गाए हुए गाने “तेरी निगाहों पर मर मर गए हम”… संजय खरे ने तो अरुण श्रीवास्तव ने सरस्वती चंद्र के “चंदन सा बदन, चंचल चितवन”.. गाकर मुकेश की याद ताजा कर दी। वहीं दूसरी तरफ राकेश श्रीवास्तव ने ‘बुड्ढा मिल गया’ फिल्म के “रात कली एक ख्वाब में आई”… गाकर तो  सेहरा फिल्म के “पंख होते तो उड़ आती  रे”…की धुन बांसुरी  पर छेड़कर माहौल को रंगीन बना दिया । दूसरी तरफ लता मंगेशकर के मेरा साया फिल्म के “नैनो में बदरा छाए” …. रागिनी श्रीवास्तव ने तो संगीता  सक्सेना  ने  गुड्डी फिल्म  के   वाणी  जयराम द्वारा गाए  “बोल  रे पपिहरा”… प्रस्तुत गाना  सावन के मौसम के  अनुरूप  रहा। एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने पवित्र पापी फिल्म के “तेरी दुनिया से होके मजबूर चला”…, निशि सक्सेना  और  विजय  सक्सेना द्वारा  कभी-कभी  फिल्म के  “तेरे  चेहरे से  नजर नहीं  हटती  नजारे  हम  क्या  देखे”…,सुनिता श्रीवास्तव ने  दिल वाले  दुल्हनिया  ले  जाएंगे  का  “मेरे  ख्वाबों  में  जो  आए”…ऋतु सक्सेना ने लता मंगेशकर का “एक प्यार का नगमा है”, तो मुकुंद श्रीवास्तव ने मोहम्मद रफी  द्वारा  गाया “आज की रात मेरे दिल की सलामी ले ले”… गाकर  गायकों के हुनर की याद दिला दी ।   शैलेश  श्रीवास्तव ने मुकेश द्वारा गाए “जीना यहां, मरना यहां, इसके  सिवा जाना कहां”…  तो विजय सक्सेना ने आनंद फिल्म के “कहीं दूर जब दिन ढल जाए”… गाकर मुकेश की स्मृतियों को और ताजा कर दिया। इसी तरह रत्ना खरे ने  आशा भोसले  के गीत “आँखों से जो उतरी है दिल में …राजीव श्रीवास्तव ने “सजनवा बेरी हो गए हमार”… राजीव श्रीवास्तव और बृजेश सक्सेना ने पत्थर के  सनम के मुकेश द्वारा  गाए “तोबा ये मतवाली चाल”…तो कमोद और  कविता  सक्सेना  ने  “वो  परी कहाँ  से    लाऊं  तेरी  दुल्हन  जिसे  बनाऊँ” गाकर मुकेश को अपनी भावांजलि  अर्पित की। कार्यक्रम में  श्री  शुभेन्दु शशांक  श्रीवास्तव  की  ओर से सभी  गायकों  को  स्मृति  चिन्ह भेंट  किए । अंत में  आभार  उपाध्यक्ष श्री  सुरेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किया ।

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