बड़वानी में मरीजों को बेचने वाले 8 कर्मचारियों को किया निष्काषित

khabar pradhan

संवाददाता

19 March 2025

अपडेटेड: 6:38 PM 0thGMT+0530

एंबुलेंस स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई

एमपी के बड़वानी में 108 वाहन के स्टाफ द्वारा घायलों को शासकीय अस्पतालों की बजाय निजी अस्पतालों में नीलामी लगाकर ले जाने की शिकायत पर आठ लोगों को हटाया गया। कमीशन खोरी मामले में जांच के बाद यह कार्रवाई हुई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, घायलों को निजी अस्पतालों में कमीशन के आधार पर भेजा जा रहा था।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था। 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारी घायलों को सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय, उन्हें निजी अस्पतालों को बेच रहे थे। कमीशन के लालच में ऐसा किया जा रहा था। इस मामले में शिकायत मिलने पर आठ लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है। जांच में पता चला कि एम्बुलेंस स्टाफ, निजी अस्पतालों से कमीशन लेता था और घायलों को उन्हीं अस्पतालों में ले जाता था। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और सांसदों तक पहुंची थी जिसके बाद कार्रवाई की गई।

बड़वानी जिले की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर सुरेखा जमरे ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 108 और जननी वाहनों के स्टाफ के खिलाफ शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया था कि ये लोग मरीजों को सरकारी अस्पतालों की जगह निजी अस्पतालों में ले जा रहे हैं। ऐसा कमीशन के चक्कर में किया जा रहा था। जांच के बाद यह बात सही पाई गई.

डॉक्टर जमरे ने बताया कि इस मामले में दो लोगों ने मुख्यमंत्री ऑनलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा क्षेत्रीय सांसद गजेंद्र पटेल और राज्यसभा सांसद डॉक्टर सुमेर सिंह सोलंकी ने भी इस पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने सीएमएचओ से इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा था। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद तीन ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) और चार पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया। एक व्हिसल ब्लोअर, सुनील शर्मा ने शिकायत की थी कि सिलावद क्षेत्र के पायलट और इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड हेमंत कमल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बाद 108 के जिला समन्वयक ने शिकायत को सही पाया और उसे भी हटा दिया।
सीएमएचओ डॉक्टर सुरेखा जमरे के अनुसार 108 के जिला समन्वयक ने ईएमटी और पायलटों की मीटिंग बुलाई। उन्हें सख्त निर्देश दिए गए कि भविष्य में ऐसी कोई भी हरकत दोबारा नहीं होनी चाहिए। 108 के जिला कोऑर्डिनेटर ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि अगर कोई भी EMT या पायलट कमीशनखोरी में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 108 का स्टाफ घायलों को सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय निजी अस्पतालों में ले जाता था। वे निजी अस्पताल के मालिकों से घायल की चोट के हिसाब से कमीशन मांगते थे। जो अस्पताल संचालक सबसे ज्यादा कमीशन देता था, 108 का स्टाफ घायल को उसी अस्पताल में पहुंचाता था।
इन घटनाओं के सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। डॉक्टर प्रमोद गुप्ता, डॉ मनोज खन्ना, डॉक्टर चंद्रजीत सांवले और अनिल पटेल ने इस मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट CMHO को सौंपी। CMHO ने बताया कि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए 108 और जननी वाहन के स्टाफ और कोऑर्डिनेटर के साथ एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जा रहा है। इस ग्रुप में घायलों या प्रसूताओं को अस्पताल पहुंचाने की जानकारी जरूरी रूप से शेयर की जाएगी। इससे पता चल सकेगा कि मरीजों को कहां ले जाया जा रहा है।

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