विजेंद्र गुप्ता ने चिट्ठी लिख जताई चिंता

khabar pradhan

संवाददाता

21 March 2025

अपडेटेड: 7:22 AM 0stGMT+0530

सरकारी अधिकारियों की लापरवाही से कराया अवगत

सरकारी अधिकारियों की लापरवाही से कराया अवगत

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर सरकारी अधिकारियों की लापरवाही पर चिंता जताई है इसके साथ ही संचार प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। आम आदमी पार्टी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी को इस स्थिति का जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि अब बीजेपी अपनी ही बनाई नीति का खामियाजा भुगत रही है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली के मुख्य सचिव धर्मेंद्र को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वे सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को सेंसेटाइज करके यह सुनिश्चित करें कि विधानसभा के सदस्यों और सरकारी अधिकारियों के बीच संचार के प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन हो। इस चिट्ठी में स्पीकर ने चीफ सेक्रेटरी को बताया कि कुछ ऐसे मामले उनके संज्ञान में लाए गए हैं, जिनमें विधानसभा के सदस्यों की चिट्ठी, फोन कॉल या मेसेजों पर संबंधित अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया।

स्पीकर ने लिखा कि यह एक गंभीर मामला है और मेरा मानना है कि इस संबंध में दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग और भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की ओर से समय-समय पर जारी किए गए सरकारी निर्देशों को तत्काल दोहराने की आवश्यकता है। उन्होंने चीफ सेक्रेटरी से कहा कि सभी प्रशासनिक सचिवों, सभी विभागों के विभागाध्यक्षों, दिल्ली पुलिस, डीडीए आदि को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के प्रति जागरूक किया जाए और इस संबंध में की गई कार्रवाई से मुझे जल्द से जल्द अवगत कराया जाए।
आम आदमी पार्टी ने स्पीकर की इस चिट्ठी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बीजेपी को अब अपनी ही बनाई कड़वी दवा का स्वाद चखना पड़ रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने एक बयान में कहा कि पिछले 10 साल से बीजेपी की केंद्र सरकार दिल्ली की अफसरशाही को यही सिखा रही थी कि चुने हुए विधायकों की बात नहीं सुननी है, मंत्रियों के ऑर्डर नहीं लेने हैं, उनकी मीटिंगों में नहीं जाना है, उनके फोन का जवाब नहीं देना है। अब अफसरों को यही आदत हो गई है और वो इनके विधायकों के भी फोन नहीं उठा रहे।
भाजपा ने राजनीतिक कारणों से दिल्ली की लोकशाही को अफसरशाही में तब्दील कर दिया है। इसके साथ ही जनता ने जिसको चुना है, वो काम तो अफसरों से ही कराएगा। आम आदमी पार्टी की सरकार जब यह मुद्दा उठाती थी तो बीजेपी हमारा मजाक उड़ाती थी, एलजी साहब ज्ञान देते हैं, केंद्र सरकार नसीहत देती थी। अब बीजेपी को अपनी ही दवा का स्वाद चखना पड़ रहा है।

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