1 सितंबर 2025: सनातन संस्कृति में भगवान गणेश का विशेष स्थान है l उन्हें प्रथम पूज्य माना जाता है l वे विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता तथा सभी शुभ कार्यों के शुभारंभ के देवता माने गए हैं l

किसी भी शुभ कार्य यज्ञ, पूजन ,विवाह इत्यादि में सदैव गणपति की पूजा ही प्रथम की जाती है l उनके नाम के उच्चारण से ही सभी बाधाएं दूर होती हैं , ऐसा माना जाता है l

गणेश जी का स्वरूप अद्वितीय है l उनके शरीर का प्रत्येक अंग किसी न किसी दर्शन का द्योतक है l

1..हाथी का सिर-
उनका विशाल शिरो भाग असाधारण प्रतिभा और स्मरण शक्ति का प्रतीक है l
2.. लंबी सूंड –
उनकी लंबी सूँड लचीलेपन और परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता दर्शाती है l

3.. बड़े कान-
उनके बड़े कान अधिक सुनने और कम बोलने का संदेश देते हैं l

4.. छोटे नेत्र-
उनके छोटे नेत्र गहन एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि के प्रतीक है l

5.. बड़ा पेट –
बड़ा पेट सहनशीलता धैर्य और संसार की सभी बातों को पचाने की क्षमता को दिखाता है l

6.. एकदंत-एक दांत का अर्थ हमें यह सिखाता है कि अपूर्णता को भी हम स्वीकार करके जीवन में महान लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

7.. वाहन चूहा-भगवान गणेश की विशाल काया के साथ मूषक वाहन , अहंकार और वासना पर नियंत्रण का प्रतीक है l चूहा एक सूक्ष्म रूप को दर्शाता है यानी इच्छाओं को नियंत्रित करना ही सच्ची शक्ति होती है।

8… चार भुजाएं-
भगवान की चारों भुजाओं में धारण की हुई वस्तुएँ जीवन का गूढ़ संदेश देती हैं l चार भुजाएं धर्म ,अर्थ, काम, और मोक्ष को प्रतिपादित करती हैं।

अंकुश मन और इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रतीक है l यह दर्शाता है कि साधक को अपने मन पर नियंत्रण करके धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए l
गणेश जी के हाथ में पाश अर्थात फंदा, आसक्ति और मोह को वश में करने की शक्ति का प्रतीक है l यह दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों को बुराइयों और बंधनों से खींचकर मुक्त करते हैं l
भगवान का एक हाथ सदैव वरद मुद्रा , अर्थात आशीर्वाद मुद्रा में रहता है l यह करुणा कृपा और वरदान का प्रतीक हैl इसका अर्थ यह है कि, भगवान गणेश अपने भक्तों को भय और विघ्नों से मुक्त करके उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं l
भगवान के हाथ में लड्डू या मोदक आत्मज्ञान और साधना का प्रतीक है lयह दर्शाता है कि आत्म संयम और भक्ति का मीठा परिणाम अंततः सुख और ज्ञान के रूप में मिलता है l

भगवान गणेश की पूजा विधि-

गणेश जी की पूजा सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है l सर्वप्रथम स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थान पर आसान लगाएं l भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें l गंगाजल ,दूध ,दही ,शहद ,घी से स्नान कराएं l वस्त्र, जनेऊ और पुष्प अर्पित करें , अक्षत चंदन अर्पित करें l दूर्वा अवश्य चढ़ाएं, यह उन्हें बहुत प्रिय है l धूप एवं दीप प्रज्वलित करें l
मोदक ,लड्डू फल का भोग लगाए तत्पश्चात आरती करें और प्रसाद बांटे l पूजा के दौरान “ऊँ गं गणपतयै नमः” मंत्र का जप भी कर सकते हैं ।

भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं ,और हर कार्य में सफलता मिलती है। वे बुद्धि, विवेक और ज्ञान के दाता हैं, इसलिए उनकी आराधना से सही निर्णय लेने की क्षमता और शिक्षा में उन्नति प्राप्त होती है। गणेश जी “मंगलमूर्ति” हैं, अतः उनकी कृपा से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही साधक में आत्मबल, धैर्य और साहस का विकास होता है तथा अंततः मोदक के समान मधुर आत्मज्ञान और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
बोलो गणपति बप्पा मोरया