27 जुलाई 2026:

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महिला सहकर्मी से दुष्कर्म के मामले में अहम फैसला सुनाया है.।  कोर्ट ने कहा कि यदि दो बालिग अपनी मर्जी से लंबे समय तक संबंध में रहते हैं, तो बाद में लगाए गए आरोपों के आधार पर उसे  अपने आपस्वत दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। मामला भोपाल के छोला थाना क्षेत्र का है। एक विवाहित महिला ने अपने केंद्रीय कर्मचारी सहकर्मी पर शादी का भरोसा देकर चार साल तक शारीरिक शोषण करने और नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में FIR  रद्द करने की याचिका दायर की।‌सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि महिला पहले से विवाहित थी और उसे पता था कि तलाक के बिना दूसरी शादी संभव नहीं है। अदालत ने कहा कि दोनों के संबंध आपसी सहमति से बने थे और जबरदस्ती, धमकी या ब्लैकमेल का कोई सबूत नहीं मिला।‌ इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एफआईआर और लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।‌

Share