थरूर-तिवारी के चयन पर बिफरे नेता, पार्टी भूली पुराना सबक ?
संवाददाता
22 May 2025
अपडेटेड: 11:22 AM 0ndGMT+0530
कांग्रेस में फिर बवाल
कांग्रेस में फिर बवाल…
कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अपने ही फैसलों के कारण विवादों के घेरे में है। शशि थरूर और मनीष तिवारी को महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए चुने जाने के बाद पार्टी के भीतर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। कई नेताओं ने इस चयन पर खुलकर नाराजगी जताई है, और इसे कांग्रेस के पुराने अनुभवों को भूलने की गलती बताया जा रहा है। आइए जानते हैं, आखिर क्या है इस विवाद की जड़ और क्यों मचा है हंगामा!
थरूर-तिवारी के चयन ने क्यों मचाया तूफान?
शशि थरूर और मनीष तिवारी के हालिया चयन ने कांग्रेस के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाई हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन दोनों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना गलत रणनीति है। नेताओं का कहना है कि यह चयन पुराने नेताओं और नई पीढ़ी के बीच टकराव को और गहरा सकता है, जैसा कि अतीत में कई बार देखा जा चुका है।
पार्टी के भीतर बगावत के सुर
कई कांग्रेसी नेताओं ने इस फैसले को आलाकमान की एकतरफा सोच करार दिया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेताओं ने इसे ‘पसंदीदा चेहरों’ को बढ़ावा देने की कोशिश बताया और सवाल उठाया कि क्या पार्टी पुराने अनुभवों से सबक नहीं ले रही। खासकर, थरूर की बेबाक टिप्पणियों और तिवारी के हालिया बयानों ने पहले भी विवाद खड़े किए हैं, जिसे लेकर पार्टी में पहले से असंतोष था।
क्या है पुराना सबक?
कांग्रेस का इतिहास ऐसे विवादों से भरा पड़ा है, जहां नेतृत्व के फैसलों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। चाहे वह 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव हों या फिर G-23 समूह की बगावत, बार-बार नेतृत्व के चयन पर सवाल उठते रहे हैं। इस बार भी नेताओं का कहना है कि थरूर और तिवारी जैसे चेहरों को आगे करने से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ सकता है।
नेताओं की नाराजगी, कार्यकर्ताओं में बेचैनी
पार्टी के इस फैसले से न केवल वरिष्ठ नेता बल्कि कार्यकर्ता भी नाराज हैं। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने अपनी भड़ास निकाली और सवाल उठाया कि आखिर पार्टी बार-बार एक ही गलती क्यों दोहरा रही है। कुछ नेताओं ने तो इसे कांग्रेस की ‘आत्मघाती रणनीति’ तक करार दे दिया।
कांग्रेस के सामने अब चुनौती है कि वह इस आंतरिक कलह को कैसे सुलझाए। क्या आलाकमान इस बगावत को शांत कर पाएगा, या यह विवाद पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगा? सभी की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस इस संकट से कैसे उबरती है और क्या वह अपने पुराने अनुभवों से कोई सबक लेगी।