ऑपरेशन सिंदूर की आग में उजड़ा मसूद अजहर का परिवार
संवाददाता
7 May 2025
अपडेटेड: 10:30 AM 0thGMT+0530
ऑपरेशन सिंदूर की आग में उजड़ा मसूद अजहर का परिवार
आतंकी सरगना का छलका दर्द
आतंक पर भारत का करारा प्रहार
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी सबसे सशक्त कार्रवाई, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, के तहत पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को तबाह कर दिया। इस ऑपरेशन में जैश सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्यों और 4 करीबी सहयोगियों की मौत ने पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है। मसूद अजहर ने इस हमले पर दुख जताते हुए कहा, “काश, मैं भी इस कारवां में शामिल हो जाता।” आइए, इस घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
मुख्य घटना: ऑपरेशन सिंदूर का दमदार आगाज
6-7 मई 2025 की रात 1:05 से 1:30 बजे के बीच भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी, जिसमें 25 भारतीय और 1 नेपाली नागरिक मारे गए थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें बहावलपुर का जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय ‘जमिया मस्जिद सुभान अल्लाह’ भी शामिल था।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री, कर्नल सोफिया कुरैशी, और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस ऑपरेशन की जानकारी दी। कर्नल कुरैशी ने बताया कि यह हमला आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए था, न कि सैन्य या नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए। हमले में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, और हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए।
मसूद के परिवार पर कहर: 10 की मौत, 4 सहयोगी ढेर
ऑपरेशन सिंदूर का सबसे बड़ा झटका जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लगा। बहावलपुर में हुए हमले में उनकी बहन, बहनोई, भांजे, भांजी, और अन्य रिश्तेदारों सहित 10 परिवारजन मारे गए। इसके अलावा, उनके 4 करीबी सहयोगी भी इस हमले में ढेर हो गए। मसूद अजहर ने एक बयान जारी कर कहा, “मेरे परिवार के 10 लोग और 4 करीबी इस हमले में मारे गए। बार-बार दिल में ख्याल आता है कि काश मैं भी मर जाता।”
यह हमला मसूद के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक दोनों स्तर पर बड़ा नुकसान है। बहावलपुर में जैश का मुख्यालय न केवल प्रशिक्षण का केंद्र था, बल्कि मसूद का परिवार भी यहीं रहता था। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने मसूद की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी थी, और 2024 के अंत में उनकी बहावलपुर में वापसी की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई।
पाकिस्तान का जवाब: गोलीबारी और आपातकाल
भारतीय हमले के तुरंत बाद, पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर पुंछ और राजौरी सेक्टर में भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में 3 भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जिसे भारतीय सेना ने युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया। भारतीय सेना ने इसका कड़ा जवाब दिया, और सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आपातकाल घोषित कर दिया गया, और वहां सड़कों पर सेना तैनात कर दी गई। पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि भारतीय हमले में नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया, लेकिन भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि केवल आतंकी ठिकाने ही नष्ट किए गए।
वैश्विक प्रतिक्रिया: समर्थन और आलोचना
ऑपरेशन सिंदूर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। फ्रांस, रूस, और जर्मनी जैसे देशों ने भारत के आतंकवाद विरोधी रुख का समर्थन किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम भारत के साथ हैं।” वहीं, कतर ने दोनों देशों से कूटनीतिक समाधान की अपील की।
कुछ इस्लामिक देशों ने भारत की कार्रवाई की आलोचना की, लेकिन भारत ने इसे ‘पाकिस्तान के इशारे पर प्रायोजित’ करार दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।
मसूद अजहर की स्थिति: जिंदा या मृत?
हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मसूद अजहर जिंदा है? भारतीय खुफिया सूत्रों ने संकेत दिया है कि मसूद हमले के समय बहावलपुर के उसी परिसर में मौजूद हो सकता था। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने कहा, “हम जमीनी खुफिया जानकारी की पुष्टि कर रहे हैं, लेकिन संभावना है कि मसूद हमले में था।” हालांकि, उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मसूद अजहर, जो 2001 के भारतीय संसद हमले का मास्टरमाइंड है, लंबे समय से भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी रहा है। 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया था।
ऑपरेशन का महत्व: भारत की नई रणनीति
ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता’ नीति का प्रतीक है। यह 1971 के युद्ध के बाद भारत की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। हमले में नौ ठिकानों को नष्ट किया गया, जिनमें मुरीदके, कोटली, गुलपुर, भिंबर, चक अमरू, सियालकोट, और मुजफ्फराबाद शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर जैश और लश्कर के प्रशिक्षण शिविर थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को नाम दिया ‘सिंदूर’, क्योंकि पहलगाम हमले में आतंकियों ने ज्यादातर पुरुषों को निशाना बनाया था, जिससे कई महिलाओं का सुहाग छिन गया। यह नाम भारत की भावनात्मक और रणनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आम जनजीवन पर असर: अनिश्चितता का माहौल
इस कार्रवाई का असर दोनों देशों के नागरिकों पर पड़ा है। भारत में कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, और सीमावर्ती क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी है। कश्मीर में स्कूल-कॉलेज बंद हैं, और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। पाकिस्तान में भी तनाव के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।
आगे की राह: शांति या संघर्ष?
विश्लेषकों का मानना है कि यह तनाव दोनों देशों के लिए खतरनाक हो सकता है। भारत और पाकिस्तान, दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं, और किसी भी गलत कदम से स्थिति बेकाबू हो सकती है। पाकिस्तान ने UNSC से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
निष्कर्ष: आतंक पर भारत का अटल संकल्प
ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल आतंकी ढांचे को ध्वस्त किया, बल्कि मसूद अजहर जैसे आतंकियों को यह संदेश भी दिया कि भारत अब चुप नहीं रहेगा। यह कार्रवाई पहलगाम के शहीदों को श्रद्धांजलि है और भारत की एकता व ताकत का प्रतीक है।