Pitru Paksha 2025: कब से शुरू हो रहे हैं पितृपक्ष, आईए जानें सही तिथि और संपूर्ण जानकारी
संवाददाता
4 September 2025
अपडेटेड: 11:23 AM 0thGMT+0530
4 सितंबर 2025: सनातन धर्म में पितृपक्ष का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। पितरों की पूजा के लिए श्राद्ध,
तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। 15 से 16 दिन की यह अवधि होती है । जिसमें हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए और मुक्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। अपने पितरों को याद करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष में हमारे पितृ इस धरती लोग पर आते है, परिवार को आशीर्वाद देते हैं और हमारे कष्टों को दूर करते हैं।
पितृ पक्ष में पूजा, दान आदि से पितृ संतुष्ट होते हैं और उनके आशीर्वाद से परिवार की उन्नति होती है जीवन सुखी और संपन्न रहता है।
पितृपक्ष की शुरुआत:
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है।
इस वर्ष साल 2025 में पितृपक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक चलेगें।
इस वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा की तिथि 7 सितंबर को रात 1:41 से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन 7 सितंबर को ही रात 11:38 पर हो रहा है। ऐसे में रविवार 7 सितंबर 2025 से पितृपक्ष की शुरुआत मानी जा रही है। और इसके समाप्ति पितृ मोक्ष अमावस्या यानि 21 सितंबर 2025 को हो रही है।
पितृ पक्ष पर श्रद्धा और तर्पण के क्या है नियम:
1..श्राद्ध हमेशा पितरों की मृत्यु के तिथि वाले दिन ही किया जाता है। यदि हमें अपने पितरों की मृत्यु की तिथि ना मालूम हो तो पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं।
2..श्राद्ध वाले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना, दान दक्षिणा देना और जरूरतमंद को जरूर की चीजें देने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
3..पितृ पक्ष में जल ,तिल और कुशा से हर दिन पितरों का तर्पण करना चाहिए और पितरों का नाम लेकर उनका तर्पण और जल अर्पित करना चाहिए।
4..पूरे पितृपक्ष में सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। तामसिक भोजन से दूरी बचकर रहना चाहिए।
5..पितृपक्ष में अपने पितरों के श्राद्ध कर्म किसी पवित्र स्थान पर या पवित्र नदी के तट पर घाट पर करना अधिक फलदाई माना जाता है।
6..पितृपक्ष में भूखों को भोजन करना, बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना, जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आईए जानते हैं पितृपक्ष में तिथि के अनुसार श्राद्ध:
1..पूर्णिमा का श्राद्ध: जिन पूर्वजो की मृत्यु पूर्णिमा के दिन हुई हो, उनका श्राद्ध 7 सितंबर के दिन किया जाएगा।
2..प्रतिपदा का श्राद्ध:
पितृपक्ष का पहला श्राद्ध 8 सितंबर 2025 को प्रतिपदा का श्राद्ध रहेगा।
3..द्वितीया तिथि का श्राद्ध:
द्वितीया तिथि का श्राद्ध 9 सितंबर 2025 को रहेगा
4..तृतीया और चतुर्थी का श्राद्ध 10 सितंबर को रहेगा ।
5..पंचमी और षष्ठी तिथि का साथ 12 सितंबर के दिन होगा ।
6..सप्तमी का श्राद्ध 13 सितंबर को होगा ।
7..14 सितंबर को अष्टमी तिथि का श्राद्ध होगा ।
8..15 सितंबर को नवमी तिथि का श्राद्ध होगा ।
9..16 सितंबर को दशमी तिथि का श्राद्ध होगा।
10..17 सितंबर को एकादशी तिथि का श्राद्ध होगा ।
11..18 सितंबर को द्वादशी तिथि का श्राद्ध होगा ।
12..19 सितंबर को त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध होगा ।
13..20 सितंबर को चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध होगा।
14.. पितृ मोक्ष अमावस्या -21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी ।
सनातन परंपरा में जिन पितरों की तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश किसी पितृ का श्राद्ध छूट जाता है ,ऐसे में सभी पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या पर किया जाता है।
(Disclaimer -यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है।)