27 अप्रैल 2026

नई दिल्ली
इंटरनेट की दुनिया में इन दिनों एलन मस्क का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट ‘ग्रोक’ काफी सुर्खियां बटोर रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें ग्रोक ने भारत के प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए एक दिलचस्प सवाल का जवाब दिया है। ग्रोक ने कांग्रेस की ‘परिवारवादी राजनीति’ के मुकाबले मोदी सरकार के कामकाज का समर्थन किया है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, एक्स पर एक यूजर ने ग्रोक से पूछा कि अगर वह एक भारतीय नागरिक होता, तो प्रधानमंत्री पद के लिए किसे वोट देता? इस पर एआई चैटबॉट ने राहुल गांधी के बजाय नरेंद्र मोदी का नाम लिया। ग्रोक ने अपने जवाब के पीछे कई ठोस कारण भी बताए, जो अब इंटरनेट पर बहस का विषय बन गए हैं।
ग्रोक ने नरेंद्र मोदी को क्यों चुना?
चैटबॉट ने अपने जवाब में मोदी सरकार की पिछले कुछ सालों की उपलब्धियों का जिक्र किया। ग्रोक के अनुसार मोदी सरकार का समर्थन करने के मुख्य कारण ये हैं:
1. बुनियादी ढांचे का विकास: देश में सड़कों, राजमार्गों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ काम।
2. डिजिटल इंडिया और यूपीआई: भारत में डिजिटल क्रांति और यूपीआई (UPI) की बढ़ती लोकप्रियता।
3. आर्थिक प्रगति: भारत का दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना।
4. तकनीक और रोजगार: तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता निवेश और रोजगार के नए अवसर।
एआई ने यह भी कहा कि मोदी सरकार का कार्यकाल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन दिखाता है, इसलिए वह उनके काम को प्राथमिकता देगा।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर क्या कहा?
जब तुलना की बात आई, तो ग्रोक ने राहुल गांधी के बारे में कहा कि वे जन कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, चैटबॉट ने कांग्रेस की राजनीति को ‘परिवारवाद’ से जोड़ते हुए उसकी आलोचना की। ग्रोक का मानना है कि नेताओं का मूल्यांकन उनके द्वारा दिए गए परिणामों और आर्थिक विकास के आधार पर होना चाहिए।
निष्पक्षता पर क्या बोला एआई?
जब एक अन्य यूजर ने ग्रोक से उसकी निष्पक्षता पर सवाल किया, तो चैटबॉट ने स्पष्ट किया कि एक एआई होने के नाते उसके पास न तो वोट देने का अधिकार है और न ही वह किसी राजनीतिक दल का सदस्य है। उसने कहा कि उसका यह जवाब केवल उपलब्ध आंकड़ों, आर्थिक विकास, सुरक्षा और तकनीकी प्रगति जैसे पैमानों पर आधारित है।
सोशल मीडिया पर इस प्रतिक्रिया के बाद लोग दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ लोग इसे एआई की समझदारी बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि एआई के जवाब उसके पास मौजूद डेटा फीडिंग पर निर्भर करते हैं।