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4 जून 2026 :
खबर प्रधान डेस्क:
कोलकाता/ विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद ममता बनर्जी की 28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बिखर गई है। बुधवार को पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ 58 बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र सौंपा। इन विधायकों ने खुद को वास्तविक टीएमसी बताते हुए मान्यता देने की मांग की। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक दल को मान्यता दे दी है और उन्हें बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर स्वीकार कर लिया। ऋतव्रत ने कहा, मैं बॉस नहीं हूं। मैं ‘हम’ में विश्वास करता हूं। सभी फैसले चर्चा के बाद लिए जाएंगे। पूरे घटनाक्रम पर अभी विधानसभा स्पीकर और ममता बनर्जी का कोई बयान नहीं आया है। ममता के पास अब 22 विधायकों का समर्थन है। हाल ही विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। स्पीकर से मिलने के बाद पत्रकार वार्ता में ऋतब्रत बैनर्जी ने कहा, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से हमारी पार्टी और जनता का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। अगर संबंध होता तो वे 26 दिनों तक छिपे नहीं रहते बल्कि बाहर आते। अभिषेक को चोरों की तरह पीटा गया है। पिटाई के बाद भी अभिषेक कह रहे थे कि उनकी सुरक्षा जनता करेगी।

पार्टी की इस बुरी हार के बाद से ही टीएमसी के बुरे दिन शुरू हो चुके हैं।  सांसद काकोली घोष सहित कई नेता ने पार्टी से मुंह मोड़ लिया है।  काकोली ने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा भी दे दिया।


ऋतब्रत ने कहा, दो तिहाई बहुमत, दूसरे गुट ने स्पीकर से लगाई गुहार:

ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के टिकट पर जीतने वाले विधायकों में से दो-तिहाई उनके साथ हैं। उनके अनुसार, कुल 80 विधायकों में से 60 विधायक उनके नेतृत्व का समर्थन कर चुके हैं। फिलहाल 58 विधायकों का समर्थन पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया है, जबकि दो अन्य विधायक राज्य से बाहर होने के कारण शीघ्र समर्थन देंगे। लिहाजा वे दल बदल विरोधी कानून के दायरे से बाहर है। दूसरी तरफ ममता बनर्जी के गुट ने स्पीकर रथींद्र बोस से मुलाकात कर निष्कासित पार्टी नेता ऋतव्रत को नेता विपक्ष बनाए जाने के समर्थन में 58 विधायकों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपने वाले बागी विधायकों के प्रस्ताव को खारिज करने की अपील की। अध्यक्ष ने दोनों गुटों की दलील सुनने के बाद ऋतव्रत के नेतृत्व वाले बागी गुट को मंजूरी दे दी।

क्या बागी गुट बनेगा असली टीएमसी:
आप यह सवाल उठता है कि क्या बागी विधायकों की सदस्यता जा सकती है? स्पीकर को ही यह फैसला करना होगा कि बागी  गुट ये दावा कर रहा है कि उसके पास दो तिहाई से अधिक विधायक है जो उनके पक्ष में है। अब यह समझना बाकी है कि क्या बागी गुट ही असली टीएमसी होगा।  वैसे तो यह निर्णय केवल निर्वाचन आयोग ही करता है ।‌महाराष्ट्र में शिव सेना और एनसीपी के मामलों में भी अंतिम फैसला आयोग ने ही किया था।  पार्टी का चुनाव चिन्ह और आधिकारिक चुनाव चिन्ह का फैसला भी निर्वाचन आयोग ही करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि अंतिम फैसला स्पीकर, ईसी और कोर्ट के फैसलों पर निर्भर करेगा ।

स्पीकर द्वारा दी गई मान्यता विधायक दल के लिए है ना किसी मूल राजनीतिक संगठन के लिए।  मामला कोर्ट भी जा सकता है।  हालांकि इसके लिए दो तिहाई यानी 28 में से 19 लोकसभा सांसदों की जरूरत होगी।  इसके अलावा संगठन के पदाधिकारियों की सोच और उनका रुख महत्वपूर्ण माना जाएगा और इससे बचने के लिए ममता ने पहले ही सभी कमिटियां भंग कर दी हैं।


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