21 मई 2026
वाशिंग्टन DC:
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट में 50-47 से पास हुआ प्रस्ताव, विपक्ष ने कहा- युद्ध शुरू करने का अधिकार सिर्फ संसद के पास हो।
वॉशिंगटन डीसी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी संसद (सीनेट) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास हो गया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ बिना संसद की मंजूरी के युद्ध करने या सैन्य कार्रवाई करने पर रोक लगाना है। हैरान करने वाली बात यह रही कि इस वोटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प की अपनी ही पार्टी के चार सांसदों ने उनके खिलाफ जाकर विपक्षी पार्टी का साथ दिया।
अपनी ही पार्टी के सांसदों ने दिया झटका
इस पूरे मामले में राष्ट्रपति ट्रम्प को तब बड़ा झटका लगा जब रिपब्लिकन पार्टी के ही चार सांसदों ने विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके अलावा, तीन रिपब्लिकन सांसद इस पूरी मतदान प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुए। सांसदों की इस बगावत की वजह से यह प्रस्ताव 50 के मुकाबले 47 वोटों से पास होने में कामयाब रहा।
युद्ध का फैसला राष्ट्रपति नहीं, संसद करे: विपक्ष
इस वोट को अमेरिकी विपक्ष (डेमोक्रेट्स) के लिए एक बहुत बड़ी जीत माना जा रहा है। प्रस्ताव को लाने वाले वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन का कहना है कि अमेरिका में युद्ध शुरू करने या देश की सेना को कहीं भेजने का अंतिम अधिकार अकेले राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि देश की संसद के पास होना चाहिए। उन्होंने बहस के दौरान कहा कि जब हर तरफ युद्धविराम की बातें हो रही हैं, ऐसे में राष्ट्रपति ट्रम्प को संसद के सामने आकर अपनी रणनीति साफ करनी चाहिए।
व्हाइट हाउस की दलील और कानूनी नियम
दूसरी तरफ, इस मामले पर व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रम्प का बचाव किया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रम्प ने अमेरिकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने अधिकारों के तहत ही ईरान पर कार्रवाई की थी। अमेरिकी नियमों के अनुसार, कोई भी राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के बिना केवल 60 दिनों तक ही सैन्य कार्रवाई चला सकता है। इसके बाद या तो युद्ध को खत्म करना होता है, या कांग्रेस (संसद) से इसकी लिखित अनुमति लेनी होती है। अगर अनुमति नहीं मिलती, तो सेना को सुरक्षित वापस बुलाने के लिए 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी जाती है।
आगे की राह नहीं है आसान
भले ही यह प्रस्ताव सीनेट से पास हो गया है, लेकिन इसे पूरी तरह कानून बनने के लिए अभी कई मुश्किल चरणों से गुजरना होगा:
सीनेट के बाद अब इस प्रस्ताव को ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ (निचले सदन) से मंजूरी लेनी होगी, जहाँ रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है।
अगर यह प्रस्ताव वहाँ से भी पास हो जाता है, तो भी राष्ट्रपति ट्रम्प के पास इसके खिलाफ वीटो (Veto) पावर इस्तेमाल करने का अधिकार है।
ट्रम्प के वीटो को रद्द करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की जरूरत होगी, जो मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए काफी मुश्किल नजर आ रहा है।
अगर यह प्रस्ताव भविष्य में कानून का रूप ले लेता है, तो ट्रम्प सरकार को ईरान के खिलाफ किसी भी तरह का युद्ध जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य हो जाएगा।


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