29 जून 2026:
मध्य प्रदेश/ खंडवा/
वन विभाग की टीम पर घातक हमला: सिर फोड़ा ,कान काटे, महिलाओं की वर्दी फाड़ी:
मध्य प्रदेश के खंडवा के वन परिक्षेत्र गुड़ी के आमाखजूरी के जंगल में अतिक्रमणकारियों ने वन विभाग की टीम पर खूनी हमला बोल दिया। इस हमले में 12 वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिन्हें सिर, हाथ पैर में गंभीर चोटें आई हैं। गंभीर रूप से घायल पांच वनकर्मियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दरअसल रविवार 28 जून को वन विभाग की एक टीम के करीब 40 वनकर्मी करीब 11:00 बजे आमाखजूरी इलाके में अपनी ड्यूटी कर रहे थे। वहीं अतिक्रमणकारी जंगल में बोवनी करने पहुंचे थे। इसी बीच गश्त कर रहे करीब 40 वनकर्मी कर्मी उन्हें रोकने के लिए पहुंचे। जहां उनकी अतिक्रमणकारियों से झड़प हुई। इसी बीच करीब 200 अतिक्रमणकारियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और गुलेल से एक के बाद एक पत्थर बरसाने लगे। जिससे वनकर्मी जमीन पर गिर गए। इससे उन्हें गंभीर चोटें आई। किसी का कान कट गया किसी के सिर पर चोटें आई। कई कर्मचारियों की वर्दी भी फाड़ दी गई।
खूनी संघर्ष में कई वनकर्मी हुए गंभीर रूप से घायल:
इन अतिक्रमण कार्यों और वनकर्मियों के बीच करीब 2 घंटे तक संघर्ष चला। इन अतिक्रमण कार्यों ने वनरक्षक शैलेंद्र यादव का एक धारदार हथियार से कान काट दिया । ज्वाला सिंह को सिर और गर्दन पर पत्थर मारकर घायल किया। वहीं प्रदीप ,रोमांक, ओम प्रकाश पिंडारे ,राजेश बांगड़ी, शैलेंद्र यादव ,चंद्रपाल तोमर, राजेंद्र शक्तावर और सोहन कवचे को लाठियां से बुरी तरह पीटा गया।
बुरी तरह घायल वनकर्मी रोमांक नायक ने बताया की आमाखजूरी में अति प्रमाण कार्यों को भूमि करने से रोकने के लिए गए थे । तभी अतिक्रमणकारियों ने महिलाओं को आगे करके डंडे से हमला बोल दिया। इसके बाद पत्थर भी बरसाए। वन कर्मी अपनी जान बचाते हुए वहां से भागते हुए नजर आए। इसी बीच अतिक्रमणकारी बोवनी करने पहुंचे हल और बैल लेकर वहां से निकल गए । घटना की जानकारी मिलने पर डीएफओ राकेश कुमार डामोर जिला अस्पताल पहुंचे और घायल वनकर्मियों से घटना की जानकारी ली।
अतिक्रमणकारियों ने 16 हजार हेक्टेयर पर किया है अतिक्रमण:
बैंड कर्मियों ने बताया कि खंडवा जिले में करीब 16000 हेक्टेयर वन क्षेत्र पर अतिक्रमण कार्यों ने अतिक्रमण किया हुआ है जिसमें से आ खजूरी इलाके में ही करीब 100 हेक्टेयर की वन भूमि पर कब्जा है।
यहां पर उन्होंने लकड़ी और पाइप में कीले गाड़कर उन्हें जमीन में दबा दिया है । इन कीलों को इस तरह से लगाया गया है कि वन कर्मियों के गाड़ी आने पर टायर पंचर हो जाए। जंगल में मोबाइल का नेटवर्क भी काम नहीं करता। गाड़ी खराब होने पर वनकर्मी किसी को मदद के लिए बुला नहीं सकते। यह उनकी बिल्कुल सोची समझी रणनीति है । इसके लिए एक संगठित गिरोह कार्य कर रहा है।
पुलिस की भूमिका सवालों में:
वन विभाग के इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और वन कर्मियों पर इस हमले से अधिकारियों में डर का माहौल है। कोई भी कर्मचारी वहां जाने से डर रहा है। और सवाल उठाए जा रहे हैं कि जंगल में इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पर किसे संरक्षण मिल रहा है । इसमें वन विभाग और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


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