डिजिटल स्क्रीन देखने से लोगों में हो रही परेशानियां

khabar pradhan

संवाददाता

25 February 2025

अपडेटेड: 6:33 AM 0thGMT+0530

डिजिटल स्क्रीन देखने से लोगों में हो रही परेशानियां

डिजिटल स्क्रीन पर हर दिन समय बिताने से निकट दृष्टिदोष या मायोपिया का खतरा 21 फीसदी बढ़ सकता है

अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना एक घंटे से कम स्क्रीन देखने से ही इस समस्या का जोखिम कम रहता है, लेकिन एक से चार घंटे तक स्क्रीन के संपर्क में रहने से मायोपिया का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। निकट दृष्टि दोष के बढ़ते हुए मामलों के पीछे मुख्य कारण डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग माना जा रहा है।

टैबलेट या स्मार्टफोन जैसी डिजिटल स्क्रीन पर ही हर दिन एक से चार घंटे तक का समय बिताने से निकट दृष्टिदोष या मायोपिया का खतरा 21 फीसदी तक बढ़ सकता है। यह जानकारी जामा नेटवर्क ओपन नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने भी आई है। इस शोध अध्ययन में 45 अलग- अलग जांच-पड़तालों के आंकड़ों का विश्लेषण भी किया गया है! जिसमें बच्चों से लेकर युवा वयस्कों तक 3 लाख 35 हजार से अधिक प्रतिभागी भी शामिल थे।

अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना एक घंटे से कम स्क्रीन देखने से इस समस्या का जोखिम कम ही रहता है, लेकिन एक से चार घंटे तक स्क्रीन के संपर्क में ही रहने से मायोपिया का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। निकट दृष्टि दोष के बढ़ते हुए मामलों के पीछे मुख्य कारण डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग ही माना जा रहा है।

निकट दृष्टि दोष से बचाव के लिए उपाय
शोध में बताया गया है कि आंखों पर स्क्रीन के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ही 20-20-20 नियम अपनाने चाहिए। आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने के लिए हर 20 मिनट में ही डिजिटल स्क्रीन से 20 सेकंड तक दूर ही रहें और 20 फीट दूर तक किसी भी चीज को देखें। इसके अलावा दिन में कम से कम दो घंटे बाहर प्राकृतिक रोशनी में बिताने से आंखों की थकान कम भी की जा सकती है। निकट दृष्टि दोष से बचने के लिए स्क्रीन की सेटिंग्स में बदलाव भी करना, जैसे नीली रोशनी फिल्टर का उपयोग और स्क्रीन की ब्राइटनेस को भी कम रहनी चाहिए।

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