14 मई 2026

नई दिल्ली:
देश में फिजूलखर्ची रोकने और संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी पहल की है। पश्चिम एशिया के युद्ध से पैदा हुए ईंधन संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल और पैसों की बचत के लिए कड़े कदम उठाए हैं, जिसका असर अब प्रधानमंत्री से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक के काफिले में दिखने लगा है।
काफिले में गाड़ियों की संख्या 50 प्रतिशत कम हुई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पहल करते हुए अपने काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या में 50 फीसदी तक की कटौती कर दी है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में जाते समय पीएम के काफिले में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए सिर्फ दो गाड़ियां ही देखी गईं।
दिग्गज मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी घटाया तामझाम
प्रधानमंत्री की इस अपील का असर पूरी सरकार पर पड़ा है:
गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के डॉ. मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी और हरियाणा के नायब सिंह सैनी ने भी अपने सुरक्षा काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला किया है। इसके अलावा राजस्थान की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कई राज्यों के राज्यपालों ने भी इसी तरह कटौती की है।
सुरक्षा के ‘ब्लू बुक’ नियमों के साथ तालमेल
यह बदलाव सुरक्षा से समझौता किए बिना किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए ‘ब्लू बुक’ में दर्ज सुरक्षा मानकों को बरकरार रखते हुए गाड़ियों की संख्या को तर्कसंगत बनाया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इन नियमों का सख्ती से पालन कर रही हैं ताकि सुरक्षा में कोई कमी न आए।
बचत का मकसद: विकास कार्यों पर जोर
सरकार का मानना है कि संकट के समय सरकारी खर्च में कटौती करना जरूरी है ताकि इसका नकारात्मक असर देश के आर्थिक विकास पर न पड़े। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कटौती सिर्फ संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग तक सीमित है।
सरकार का इरादा सिर्फ खर्च को कम करना और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को घटाना है।
इससे होने वाली बचत का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं और विकास की गति को बनाए रखने में किया जाएगा, ताकि जनता को मिलने वाली सुविधाओं में कोई कमी न आए।