27 अप्रैल 2026
भोपाल
कतर में जासूसी और वित्तीय गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोपों से कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद भी भोपाल के रहने वाले पूर्व नौसेना कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य सात पूर्व नौसेना अधिकारी तो स्वदेश वापस लौट चुके हैं, लेकिन पूर्णेंदु तिवारी अब भी दोहा की एक हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद हैं। इस स्थिति से परेशान उनके परिवार ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील की है।
अदालत ने किया बरी, फिर भी कैद में क्यों?
कमांडर पूर्णेंदु की बहन मीतू शुक्ला ने बताया कि कतर की हाई कोर्ट ने 12 मार्च को ही उनके भाई को सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया था। जब उनके बाकी साथियों को रिहा कर भारत भेज दिया गया, तो पूर्णेंदु को क्यों रोक लिया गया, यह सवाल पूरे परिवार को परेशान कर रहा है। परिवार का आरोप है कि उन्हें जबरन हिरासत में रखा जा रहा है, जबकि अदालत उन्हें निर्दोष मान चुकी है।
खराब स्वास्थ्य और युद्ध का खतरा
65 वर्षीय पूर्णेंदु तिवारी की सुरक्षा और सेहत को लेकर भोपाल में उनका परिवार गहरे तनाव में है। उनकी 87 साल की बुजुर्ग मां और बहन उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। परिवार की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जिस जेल में पूर्णेंदु बंद हैं, वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पास है। हाल के दिनों में मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और मिसाइल हमलों के कारण उनकी जान पर खतरा और बढ़ गया है।
कौन हैं कमांडर पूर्णेंदु तिवारी?
पूर्णेंदु तिवारी भारतीय नौसेना के एक बहुत ही सम्मानित अधिकारी रहे हैं। वे ‘नेविगेशन एक्सपर्ट’ माने जाते हैं और उन्होंने युद्धपोत आईएनएस मगर की कमान भी संभाली थी। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘प्रवासी भारतीय सम्मान’ से भी नवाजा जा चुका है। रिटायरमेंट के बाद वे ‘दहरा ग्लोबल’ नाम की कंपनी से जुड़े थे, जो कतर की नौसेना को ट्रेनिंग देने का काम करती थी।
परिवार की प्रधानमंत्री से अपील
मीतू शुक्ला ने कहा कि जिस तरह भारत सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए बाकी सात नौसैनिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की, उसी तरह उनके भाई को भी इस अन्यायपूर्ण कैद से तुरंत मुक्त कराया जाए। उन्हें डर है कि किसी गहरी साजिश के तहत उनके भाई को इस मामले में फंसाया गया है और उनका प्रभाव इस्तेमाल कर उन्हें रोका जा रहा है।
भोपाल का यह परिवार अब पूरी तरह से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की ओर देख रहा है, ताकि उनका बेटा और भाई जल्द से जल्द सुरक्षित अपने घर लौट सके।


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