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20 मई 2026

धार:

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भोजशाला को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। हाई कोर्ट के एक बड़े निर्णय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई विभाग द्वारा साल के 365 दिन निर्बाध पूजा करने की नई गाइडलाइन जारी किए जाने के बाद, पहले मंगलवार को यहाँ एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला।
भोजशाला परिसर में सनातन चेतना का एक विराट महासत्याग्रह और महाविजय महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें धार जिले के साथ-साथ आसपास के कई इलाकों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते पूरा परिसर भगवामय हो गया और हर तरफ जय श्रीराम और मां वाग्देवी के जयकारे गूंज उठे।

721 साल बाद पहली बार हुआ 24 घंटे का अखंड पूजन
भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने इस मौके पर एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भोजशाला के इतिहास में पूरे 721 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब परिसर के भीतर लगातार 24 घंटे तक मां वाग्देवी की अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई और निर्बाध रूप से पूजन कार्य चलता रहा। मंदिर के ठीक सामने इस अखंड ज्योति की स्थापना की गई है।
अदालत का फैसला आने के बाद समाज के लोगों में इस कदर उत्साह देखा गया कि पिछले तीन दिनों से यहां लगातार प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना का दौर चल रहा है। इस अनोखे अनुष्ठान में बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक, सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

जब तक प्रतिमा स्थापना नहीं, तब तक जारी रहेगा सत्याग्रह
इस भव्य आयोजन के दौरान भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे ने एक बहुत बड़ी घोषणा की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हाई कोर्ट और एएसआई के आदेश के बाद यह तो बस शुरुआत है। जब तक भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को फिर से पूरी गरिमा के साथ स्थापित नहीं कर दिया जाता, तब तक उनका यह सत्याग्रह इसी तरह लगातार जारी रहेगा।
इसी सुर में कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने केंद्र सरकार से पुरजोर अपील की कि वर्तमान में लंदन के म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी (मां सरस्वती) की मूल प्रतिमा को जल्द से जल्द सम्मान सहित भारत वापस लाया जाए।

वैदिक मंत्रोच्चार और आतिशबाजी से गूंज उठा परिसर
मंगलवार को सुबह निर्धारित समय पर परंपरा के अनुसार सत्याग्रह शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते एक बड़े महाविजय महोत्सव का रूप ले लिया। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता हाथों में भगवा ध्वज लेकर भोजशाला पहुंचे। पूरा परिसर काफी देर तक वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद से गुंजायमान रहा। मां वाग्देवी की विशेष आराधना, पूजन-अर्चन और हवन पूरी धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न किया गया।
खुशी का आलम यह था कि श्रद्धालु अपने साथ आतिशबाजी की सामग्री भी लेकर आए थे, जिससे पूरा परिसर दीपों की रोशनी, जयघोषों और रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा।

बलिदानियों को समर्पित रहा यह महासत्याग्रह
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि एएसआई की नई गाइडलाइन के सामने आने के बाद अब कमाल मौला मस्जिद का नाम पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का यह जो महासत्याग्रह है, यह असल में उन सभी कारसेवकों और सनातनियों को समर्पित है जिन्होंने भोजशाला की मुक्ति के लिए लंबा संघर्ष किया, लाठियां खाईं, जेल गए और अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
साथ ही हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश और नई व्यवस्था के तहत अब भोजशाला परिसर के भीतर कुल 94 मूर्तियां स्थापित रहेंगी। इसमें भगवान विष्णु, शिव, हनुमान जी, म्यूटिलेटेड यानी खंडित मूर्तियां और वाग्देवी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं।

शुक्रवार को होगी ऐतिहासिक महाआरती, तैयारियां हुईं तेज
भोजशाला मामले में कोर्ट का रुख साफ होने के बाद अब आने वाले शुक्रवार यानी 22 मई को होने वाली महाआरती को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं। इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है जब हिंदू समाज को इस तरह का अवसर मिलने जा रहा है, जहां वे शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर के भीतर मां सरस्वती का पूर्ण पूजन-अर्चन और महाआरती कर सकेंगे। दोपहर ठीक एक बजे इस महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
इस संबंध में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान अशोक जैन और दीपक बिड़कर ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए बताया कि राजा भोज द्वारा निर्मित इस पवित्र मां सरस्वती मंदिर भोजशाला पर वर्ष 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने कब्जा कर लिया था और उसे अपवित्र किया था। तभी से हिंदू समाज यहां अपने पूजा-अर्चना के अधिकारों को वापस पाने के लिए लगातार संघर्ष करता आ रहा है। अब जब अदालत ने उनके हक में फैसला सुनाया है, तो हिंदू समाज अपने पूरे अधिकार और सम्मान के साथ मां सरस्वती की आराधना करेगा। समिति ने इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए अधिक से अधिक संख्या में लोगों से शुक्रवार को भोजशाला पहुंचने का आह्वान किया है।


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