26 अप्रैल 2026
जबलपुर
मध्य प्रदेश में रियल एस्टेट से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले ‘रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण’ (REAT) में अध्यक्ष की नियुक्ति न होने का मामला अब गरमा गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों से हलफनामा मांगा है। कोर्ट चाहता है कि सरकार बताए कि अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
क्यों ठप पड़ा है कामकाज?
दरअसल, 14 मार्च 2026 को पिछले अध्यक्ष के रिटायर होने के बाद से यह पद खाली पड़ा है। नियम तो यह कहता है कि पद खाली होने से पहले ही नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अध्यक्ष न होने की वजह से ‘कोरम’ (जरूरी सदस्य संख्या) पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे रेरा कोर्ट में अपीलों की सुनवाई पूरी तरह बंद हो गई है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो अपने घरों या जमीन से जुड़े विवादों के न्याय के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।
सरकार ने माँगा चार महीने का वक्त
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय माँगा था। इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नियमों के मुताबिक यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था।
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और अगली तारीख
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनेंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या नियुक्तियों में जानबूझकर देरी की जा रही है? अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
क्या होगा अगली सुनवाई में?
29 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में सरकार को अपना जवाब (हलफनामा) पेश करना होगा। कोर्ट सरकार के जवाब और याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद यह तय करेगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, रेरा कोर्ट में पेंडिंग पड़े हजारों मामलों के भविष्य पर संशय बरकरार है।


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