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23 मई 2026

भोपाल:
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जजों की कमी को दूर करने के लिए सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है। यह सभी नए जज जिला न्यायालयों से प्रमोट होकर हाई कोर्ट पहुंचेंगे। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो अगले छह महीनों के भीतर इन सभी की नियुक्ति हाई कोर्ट में हो सकती है। उच्च न्यायालय ने इसके लिए सात वरिष्ठ जजों के नामों की सिफारिश कॉलेजियम को भेजी थी, जहाँ से अब यह सूची मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास पहुंच चुकी है।
जिन जजों के नामों की सिफारिश की गई है उनमें रेणुका कंचन, कृष्ण मूर्ति मिश्रा, वीरेंद्र सिंह राजपूत, ममता जैन, आशिता श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह और उमेश पांडव के नाम शामिल हैं।

क्यों पड़ी नए जजों की जरूरत और क्या है मौजूदा स्थिति?
हाई कोर्ट में जजों के पद खाली होने और मौजूदा जजों के रिटायरमेंट को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। वर्तमान में सर्विस जजों के तीन पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा, चौथी वैकेंसी मई महीने के अंत में और पांचवीं वैकेंसी आने वाले जून महीने में होने जा रही है। मौजूदा जजों में से एक माननीय न्यायाधीश सितंबर में और एक अन्य न्यायाधीश नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। इन्हीं खाली होने वाले पदों को भरने के लिए कॉलेजियम और केंद्र सरकार के सामने नए जजों के नाम भेजे गए हैं। न्यायिक सूत्रों की मानें तो इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग तीन से चार महीने का समय लग सकता है।
जानिए कौन सा जज अभी किस पद पर है तैनात
इस लिस्ट में शामिल सभी जज वर्तमान में बेहद महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
श्रीमती रेणुका कंचन वर्तमान में भोपाल में गैस त्रासदी पीड़ित कल्याण आयोग में रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं।
कृष्ण मूर्ति मिश्रा जबलपुर में प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।
वीरेंद्र सिंह नीमच में प्रधान जिला न्यायाधीश हैं।
ममता जैन धार में और आशिता श्रीवास्तव झाबुआ में प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
धरमिंदर सिंह वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रजिस्ट्रार जनरल के बेहद महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ हैं।
उमेश पांडव पूर्व में विधि विभाग में विधि सचिव रह चुके हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायिक अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
किन नामों को नहीं मिली जगह?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ अन्य नामों पर भी विचार किया गया था, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें शामिल नहीं किया जा सका। फिलहाल प्रधान जिला न्यायाधीश आनंद तिवारी (शाजापुर), मनोज श्रीवास्तव (भोपाल), सुशांत हुद्दार (छिंदवाड़ा) और महेश कुमार शर्मा (सागर) के नाम रोक दिए गए हैं। अंतिम सूची में धरमिंदर सिंह और उमेश पांडव के नाम सुशांत हुद्दार और महेश शर्मा को सुपरसीड करके (यानी उनसे आगे रखते हुए) भेजे गए हैं।


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