14 अप्रैल 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश का राइस मिल उद्योग इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। करीब 1200 राइस मिलें वित्तीय परेशानी से जूझ रही हैं, जिनमें से लगभग 700 मिलें बंद हो चुकी हैं। मिलर्स का कहना है कि सरकार की ओर से नुकसान की भरपाई और जरूरी भुगतान समय पर नहीं मिलने के कारण यह स्थिति बनी है।
मिलर्स ने अपनी समस्याओं को लेकर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने जल्द समाधान की मांग करते हुए बताया कि कई जरूरी मदों का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है, जिससे उद्योग पर भारी दबाव बन गया है।
मिलर्स के अनुसार वर्ष 2024-25 के लिए धान के अपग्रेडेशन और कस्टम मिलिंग से जुड़ी करीब 170 करोड़ रुपये की राशि अब तक नहीं मिली है। इसके अलावा बारदाने की उपयोगिता खर्च, धान मिलिंग, परिवहन और अतिरिक्त बारदाने की राशि भी अटकी हुई है। कस्टम मिलिंग राइस के तहत प्रति क्विंटल मिलने वाली राशि, हम्माली, मजदूरी और अन्य खर्चों का भुगतान भी समय पर नहीं हो पाया है।
इन बकाया भुगतानों के कारण मिलर्स को बैंक लोन की किस्तें, बिजली बिल, मजदूरी और अन्य खर्च उठाने में परेशानी हो रही है। कई मिलर्स डिफॉल्टर हो चुके हैं और उन्हें मिल बंद करने की नौबत आ गई है।
मिलर्स ने यह भी बताया कि धान से चावल निकालने की गुणवत्ता को लेकर भी समस्या सामने आई है। जांच में पाया गया कि चावल की रिकवरी तय मानकों से कम है, जबकि टूटे चावल की मात्रा ज्यादा है। इस कारण भी मिलर्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके अलावा सरकार द्वारा तय अपग्रेडेशन राशि और अन्य भुगतान में देरी के चलते मिलर्स को हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त ब्याज, भंडारण शुल्क और नुकसान झेलना पड़ रहा है। गोदामों में रखा धान खराब होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
मिलर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो और अधिक मिलें बंद हो सकती हैं, जिससे प्रदेश में चावल उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।


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