27 अप्रैल 2026
भोपाल।

मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारी अब सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। पिछले कई महीनों से वेतन न मिलने और आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन कर्मचारियों ने अब बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने एलान किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आने वाली 4 मई से प्रदेश भर के करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू कर देंगे।
5-6 महीने से नहीं मिला वेतन, घर चलाना हुआ मुश्किल
कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 5 से 6 महीनों से उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। वेतन न मिलने की वजह से इन कर्मचारियों के सामने अब घर चलाने का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस जमा करने से लेकर रोजमर्रा के राशन तक के लिए उन्हें दूसरों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर कर्मचारियों का शोषण है।

डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ का ढिंढोरा पीटती है और हर काम को ऑनलाइन और तेज करने का दावा करती है, लेकिन जब बात गरीबों और मेहनत करने वाले कर्मचारियों के वेतन की आती है, तो तकनीक काम नहीं करती। कोमल सिंह ने पूछा कि आखिर तकनीक की बात वेतन के समय क्यों नहीं होती?

काम का दबाव और सुविधाओं का अभाव
कर्मचारियों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे न केवल वेतन की कमी से जूझ रहे हैं, बल्कि उन्हें मिलने वाली सुविधाओं में भी भारी कटौती की जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना, अनियमित भुगतान, स्वास्थ्य बीमा की कमी और पीएफ (एनपीएस) जैसी बुनियादी सुविधाओं का न होना उनके लिए बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जब एक कर्मचारी खुद मानसिक तनाव में होगा और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा, तो वह मरीजों की सेवा कैसे कर सकेगा?

आंदोलन से चरमरा सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
अगर 4 मई से यह आंदोलन शुरू होता है, तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। अस्पतालों में साफ-सफाई से लेकर तकनीकी कार्यों तक में ये आउटसोर्स कर्मचारी बड़ी भूमिका निभाते हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वे केवल आश्वासन से नहीं मानेंगे, उन्हें उनके हक का पैसा और बेहतर सुविधाएं चाहिए।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस चेतावनी के बाद क्या कदम उठाती है। क्या वक्त रहते इन 30 हजार परिवारों की मुश्किलों का समाधान होगा या फिर प्रदेश को एक बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ेगा?