23 मई 2026
सतना:
मध्य प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं की मदद करने के लिए लाड़ली बहना योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के जरिए पात्र महिलाओं को सरकार की तरफ से हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है. लेकिन सतना जिले से इस योजना के गलत इस्तेमाल का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहाँ ऐसी 16 महिलाएं चिन्हित की गई हैं, जो खुद सरकारी नौकरी में हैं और राज्य सरकार के खजाने से हर महीने मोटा वेतन ले रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वे चुपके से इस योजना का लाभ भी उठा रही थीं.
लाखों रुपये डकार गईं ये नौकरीपेशा महिलाएं, अब वापस लौटाना होगा पैसा
जांच में सामने आया है कि सरकारी नौकरी करने वाली इन 16 महिलाओं ने अब तक लाड़ली बहना योजना के तहत सरकार से कुल 5 लाख 5 हजार 450 रुपये अपने खातों में हासिल कर लिए हैं. अब जब इस पूरे मामले का भंडाफोड़ हो गया है, तो इन सभी महिलाओं को योजना के तहत मिली यह पूरी रकम सरकार को वापस लौटानी पड़ सकती है. इस खुलासे के बाद से विभाग और सरकारी नौकरी करने वाली इन महिलाओं के बीच हड़कंप मच गया है. प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्राचार शुरू कर दिया है और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
कैसे खुला यह पूरा राज?
प्रशासन ने जब ट्रेजरी (सरकारी खजाने) से शासकीय भुगतान पाने वाले कर्मचारियों के डेटा का मिलान ‘समग्र आईडी’ (Samagra ID) से किया, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का पता चला. जांच में यह साफ हो गया कि जिन 16 महिलाओं का वेतन सीधे सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से जारी हो रहा है, वही महिलाएं लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी बनकर बैठी हैं. इसके बाद नगरीय निकायों की मदद से उनके आधार कार्ड, समग्र आईडी और बैंक खातों के विवरण समेत सभी जरूरी दस्तावेज मंगाकर उनकी जांच की जा रही है.
अधिकारियों का क्या कहना है?
सतना के डीपीओ राजीव सिंह के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना के पोर्टल पर जिन हितग्राहियों ने खुद घोषणा करके आवेदन भरे थे, उनके डेटा का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधार के जरिए मिलान किया गया था. मुमकिन है कि इन महिलाओं ने ओटीपी जनरेट होने के बाद दोहरा लाभ उठाने के लिए आवेदन कर दिया हो और नौकरी मिलने के बाद भी अपना पुराना रजिस्ट्रेशन रद्द न कराया हो. उन्होंने बताया कि इन संदिग्ध खातों को सक्रिय कर उनकी गहराई से जांच की जा रही है. विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि इन सक्षम और नौकरीपेशा महिलाओं ने ऐसा करके असल मायने में आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय महिलाओं का हक मारा है.


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