20 मई 2026
भोपाल:
राजधानी भोपाल में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के बीच बाजार में तरबूज, आम और खरबूजे जैसे मौसमी फलों की मांग अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ग्राहकों की इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ मुनाफाखोर कारोबारी लोगों की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। अधिक आर्थिक लाभ कमाने के चक्कर में ये कारोबारी फलों को समय से पहले पकाने के लिए खतरनाक केमिकल राइपनर का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
इस गंभीर मामले की शिकायत मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने भोपाल के कई इलाकों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। टीम ने करोंद मंडी, लालघाटी और मिनाल रेसीडेंसी जैसी जगहों से फलों के साथ-साथ संदिग्ध केमिकल राइपनर के नमूने जब्त कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई औचक कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के सख्त निर्देशों पर की गई है। कलेक्टर के आदेश के बाद खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने शहर के अलग-अलग फल बाजारों और मंडियों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने दुकानदारों की जांच की और संदिग्ध फलों के सैंपल लिए।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मंगलवार को सबसे पहले करोंद स्थित फल-सब्जी मंडी पहुंची। यहाँ टीम ने करीब एक दर्जन से अधिक बड़ी फल दुकानों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान करोंद फल मंडी की दुकान नंबर 18, जिसका संचालन ‘सईद फ्रूट कंपनी’ के मालिक मोहम्मद सईद कर रहे थे, वहां भारी गड़बड़ी पाई गई। टीम को पता चला कि वहां एथिलीन राइपनर केमिकल का इस्तेमाल करके फलों को कृत्रिम तरीके से पकाया जा रहा था। सबसे बड़ी बात यह है कि इस केमिकल का उपयोग तय मात्रा से कहीं अधिक किया जा रहा था, जो सीधे तौर पर सेहत के लिए जानलेवा हो सकता है। टीम ने मौके से इस एथिलीन राइपनर को तुरंत जब्त कर लिया।
दूसरी दुकानों पर भी हुई छापेमारी
इसके बाद टीम ने अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए करोंद मंडी की ही दुकान नंबर 13 पर छापा मारा, जिसके संचालक मोहम्मद परवेज हैं। वहां भी इसी तरह से फलों को पकाने का काम चल रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इस पूरी कार्रवाई के दौरान केमिकल राइपनर से पकाए गए तरबूज, आम और अन्य फलों के कुल 14 नमूने लिए हैं। इसके अलावा लालाघाटी और मिनाल रेसीडेंसी स्थित दंगी फल-सब्जी विक्रेता की दुकानों से भी सैंपल एकत्र किए गए हैं।
क्या होता है यह केमिकल राइपनर और क्यों है खतरनाक?
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मी के इस मौसम में आम, तरबूज और खरबूज जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए कारोबारी अक्सर केमिकल राइपनर का सहारा लेते हैं। एथिलीन राइपनर मूल रूप से एक विशेष प्रकार का तरल या पाउच होता है, जिससे निकलने वाली गैस कच्चे फलों (जैसे आम, केला, पपीता) को प्राकृतिक रूप से और एक समान तरीके से पकाने में मदद करती है।
भारत खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों के मुकाबले इसे एक सुरक्षित विकल्प के रूप में स्वीकार किया है। लेकिन शर्त यह है कि इसका उपयोग एक बेहद सीमित और तय मात्रा में ही किया जाना चाहिए। आशंका जताई जा रही है कि भोपाल के कारोबारी ज्यादा मुनाफे के लालच में तय गाइडलाइन से बहुत अधिक मात्रा में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पेट की बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। लैब की रिपोर्ट आने के बाद दोषी दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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