साइलेंट किलर जहरों का बढ़ता खतरा, पहचान से बचाव संभव:
22 मार्च 2026 मध्य प्रदेश
घर, खेत और गोदामों में उपयोग होने वाले रसायन अब चुपचाप जान ले रहे हैं। भोपाल में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक फॉस्फाइड के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए एम्स भोपाल ने इनके खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है । न्याय चिकित्सा एवं विष विज्ञान के अनुसार, समय पर जहर की पहचान हो जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती है। इस अभियान के द्वारा यही अलख जगाया जाएगा। ये दोनों रसायन अनाज संरक्षण और चूहामार दवा के रूप में बाजार में आसानी से मिलते हैं। लापरवाही, गलत भंडार और अनजाने संपर्क से लोग तेजी से इसकी चपेट में में आ रहे है। औषधि विज्ञान की डॉ. आयाशा ने बताया कि नमी या शरीर के संपर्क में आते ही ये फॉस्फीन गैस छोड़ते हैं, जो शरीर के अंदर पहुंचकर दिल, फेफड़े और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाती है। कई मामलों में कुछ ही घंटों में हालत गंभीर हो जाती है। डॉ. श्रीहरि के अनुसार, देरी जानलेवा साबित होती है। समय पर अस्पताल पहुंचने पर ऑक्सीजन और सहायक उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है। एम्स को यह अभियान लोगों को जागरूक कर खतरे को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अनाजों में रखा जाने वाले रसायन है साइलेंट किलर:

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