24 मार्च 2026
नई दिल्ली।

केंद्र सरकार कोयले से सस्ती गैस बनाने की बड़ी योजना पर काम कर रही है, जिससे घरेलू रसोई गैस की लागत कम हो सकती है। इस परियोजना पर करीब 8500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाना है।

योजना के तहत कोल गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसमें कोयले को गैस में बदला जाता है। यह गैस एलपीजी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जा सकेगी और घरेलू उपयोग के साथ-साथ उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होगी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से देश में सस्ती और स्वदेशी ऊर्जा उपलब्ध होगी। साथ ही, कोयले का बेहतर उपयोग होने से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

कंपनियों को इस परियोजना लगाने के लिए पूंजीगत उत्पाद खरीदने को टैक्स में छूट दिया जाएगा और ब्याज दर  में भी सब्सिडी दी जाएगी। सरकार ने वर्ष 2030 तक कोल गैसिफिकेशन परियोजनाओं से 10 करोड़ टन गैस निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसकी घोषणा आम बजट 2024-25 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की थी।

कोयला खदानों से निकलने वाले गैस का इस्तेमाल ईंधन में या औद्योगिक क्षेत्र में किया जा सकता है। इसकी आपूर्ति गैस आधारित बिजली संयंत्रों को भी हो सकती है। भारत में अभी 24 हजार मेगावाट क्षमता की बिजली परियोजनाएं गैस की कमी की वजह से ठप्प पड़ी हुई हैं। इन्हें कोल गैसिफिकेशन से प्लांट से गैस की आपूर्ति हो सकती है।

यदि ज्यादा मात्रा में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित होती है तो सरकार की तरफ से संबंधित कोयला खदान के आस पास उर्वरक प्लांट लगाने का फैसला किया जा सकता है। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक  अभी बहुत  कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी बड़ी मात्रा में हम गैस निकालने में सफल हो पाते हैं। यदि 10 करोड़ टन का लक्ष्य हासिल हो पाता है तो ये मौजूदा गैस उत्पादन का दोगुना होगा।


विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकेगी, क्योंकि पारंपरिक तरीकों की तुलना में यह अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है।

इस योजना के लागू होने के बाद आम लोगों को सस्ती गैस मिलने की उम्मीद है, जिससे रसोई खर्च में कमी आएगी और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।