27 अप्रैल 2026:
मध्य प्रदेश /ग्वालियर:
हाई कोर्ट ग्वालियर की खंडपीठ ने ऑफिस असिस्टेंट और डाटा एंट्री ऑपरेटर से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए एक अहम फैसला दिया। हाई कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया । राज्य सरकार की इंफ्रा कोर्ट अपील को स्वीकारते हुए कोर्ट ने कहा की भर्ती प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं थी । यह मामला 2014 में शिवपुरी में जारी एक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। याचिका कर्ता ने  यह आरोप
लगाया कि 14 जुलाई 2011 के सर्कुलर के विपरीत 26 सितंबर 2014 के विज्ञापन में योग्यता बदल दी गई।  इससे वह अयोग्य घोषित  हो गया।  इस सिंगल बेंच की खंडपीठ ने इस विज्ञापन को रद्द कर नई प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे।

इस सिंगल बेंच की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया कि तत्कालीन कलेक्टर पर कार्रवाई भी की जाए और याचिका करता को डेढ़ लाख रुपए का हर्जाना दिया जाए।  जिसमें से ₹25000 नगर निगम ग्वालियर के खाते में जमा करने थे । ग्वालियर हाई कोर्ट ने सुनवाई में पाया कि 26 सितंबर 2014 का विज्ञापन पहले ही निरस्त किया जा चुका था और 23 दिसंबर 2014 को एक नया विज्ञापन जारी किया गया था।  और इसी आधार पर भर्ती प्रक्रिया की गई थी ।
कोर्ट ने यह माना कि 2011 की सर्कुलर में इस तरह योग्यता को 30 मई 2012 को संशोधित करके 60% अंकों के साथ स्नातक का विज्ञापन निकाला गया था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नियोक्ता को शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार है।  कोई भी अभ्यर्थी  योग्यता पूरी किए बिना नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता । जबकि याचिका कर्ता 60% अंकों की अनिवार्यता पूरी नहीं करता था।  इसलिए वह इस दावेदारी के लिए वैध नहीं था।  खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर इस  अपील को  स्वीकार कर ली और मामले में कोई राशि नहीं लगाई।