26 अप्रैल 2026
रायपुर से चौंकाने वाला खुलासा
छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी के वनांचलों में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार और धर्मांतरण को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि विदेशी ताकतों द्वारा छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये भेजे जा रहे हैं और इस अवैध फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खर्च किया गया है।

कैसे हुआ इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने ‘मिकाह मार्क’ नामक एक विदेशी नागरिक को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास से अमेरिका के एक बैंक से जुड़े 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए। इन कार्ड्स के जरिए गुप्त तरीके से करोड़ों रुपये भारत लाए गए थे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पैसा भेजने का आरोप
ED की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 95 करोड़ रुपये विदेशी डेबिट कार्ड के माध्यम से निकाले गए। आरोप है कि इस पैसे का उपयोग न केवल धर्मांतरण के लिए किया गया, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी पहुंचाया गया। यह फंडिंग ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) नामक एक संगठन के माध्यम से संचालित हो रही थी।

TTI का जाल और सुरक्षा को खतरा
जांच में यह भी पता चला है कि TTI नामक यह संगठन भारत में पंजीकृत (रजिस्टर्ड) नहीं है। ED के मुताबिक, इस तरह की नकदी आधारित समानांतर अर्थव्यवस्था देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभरी है। विदेशी पैसे का उपयोग करके स्थानीय लोगों का ब्रेनवॉश करने और उन्हें मुख्यधारा से काटने की साजिश रची जा रही है।

इस पूरे अभियान का केंद्र छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जिले रहे हैं। ED अब उन सभी स्थानीय संपर्कों की तलाश कर रही है जो विदेशी नागरिकों को पैसा निकालने और उसे वनांचलों तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि इस अवैध पैसे का उपयोग कहीं देश के खिलाफ हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।