30 मार्च 2026:
जनगणना को लेकर सरकार की तैयारियां तेज:

आने वाली जनगणना 2027 को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार की जनगणना पहले के मुकाबले काफी विस्तृत और आधुनिक होने वाली है। अब नागरिकों को न केवल अपने परिवार, बल्कि अपने घर की बनावट और उसमें मौजूद सुविधाओं की भी बारीक जानकारी देनी होगी। मकान सूचीकरण (House Listing) के चरण में लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनका जवाब देना अनिवार्य होगा।
मकान और सुविधाओं का पूरा ब्यौरा
इस बार की जनगणना में यह बताना जरूरी होगा कि आपके घर की छत और दीवारें किस सामग्री (ईंट, पत्थर या कंक्रीट) से बनी हैं। साथ ही घर में कमरों की संख्या, पीने के पानी का स्रोत, शौचालय की व्यवस्था और बिजली के कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी गणना की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार आधुनिक सुविधाओं जैसे— मोबाइल फोन, इंटरनेट, रेडियो, टीवी और लैपटॉप की उपलब्धता पर भी सवाल पूछे जाएंगे। वाहनों के विवरण में साइकिल से लेकर कार, जीप और वैन तक की जानकारी दर्ज की जाएगी।
दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना का काम दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा:

स्व-गणना (Self-Enumeration): 17 अप्रैल से 1 मई तक नागरिक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए सरकार एक विशेष पोर्टल या ऐप की सुविधा उपलब्ध कराएगी।
घर-घर सर्वे: ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद 2 मई से 31 मई तक प्रगणक (सर्वे करने वाले) घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन और सर्वेक्षण करेंगे।
खान-पान और ईंधन की भी होगी गणना
सरकार इस बार जीवन स्तर का सही आकलन करने के लिए यह भी जानेगी कि परिवार मुख्य रूप से कौन सा अनाज (गेहूं, चावल, बाजरा आदि) खाता है और खाना पकाने के लिए किस ईंधन (एलपीजी या पीएनजी) का इस्तेमाल करता है। इसके पीछे का उद्देश्य डेटा को और अधिक सटीक और व्यापक बनाना है, ताकि भविष्य की सरकारी योजनाएं बेहतर ढंग से तैयार की जा सकें।
व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय, आरटीआई से भी नहीं मिलेगा जवाब
महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि जनगणना अधिनियम में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो धारा 15 में, शामिल है। इस प्रावधान के द्वारा ये बताया गया  है कि  हर किसी की व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह गोपनीय माना जाता है। इसे आरटीआई अधिनियम के तहत साझा नहीं किया जा सकता है। इसे अदालत में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे किसी अन्य संगठन  या ग्रुप के साथ साझा भी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका इस पूरे कार्य में केंद्रीय है। उनकी पूरी प्रशासनिक प्रणाली जमीनी स्तर पर यह कार्य करने में लगी हुई है।
लिव-इन कपल्स को माना जायेगा अब शादीशुदा :
सरकार की तरफ से जारी हुए FAQ के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा कपल के  तौर पर अपने संबंध को स्थिर मानता है, तो उसे शादीशुदा जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। जनगणना के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर दिए गए एक सवाल के जवाब में यह स्पष्टीकरण सामने आया ।

30 लाख कर्मियों की होगी तैनाती
जनगणना 2027 में करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारी लगाए जाएंगे। इनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और कई तकनीकी कर्मचारी शामिल किए जाएंगे । यह जनगणना अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल ऑपरेशन होगा। इस दौरान लगभग 1.02 करोड़ लोगों को रोजगार भी मिलेगा । फील्ड में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को उनके नियमित काम के अलावा यह अतिरिक्त जिम्मेदारी के लिए मानदेय भी तय किया गया है।

घर-घर जाकर होगा डिजिटल सर्वे
जनगणना करने वाले गणनाकार , जो आमतौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं, अपने  मोबाइल ऐप में घर-घर जाकर सभी जानकारी दर्ज करेंगे। इसमें हर घर की लोकेशन के साथ सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की  संख्या,शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, विकलांगता, प्रवासन और अन्य जरूरी विवरण दर्ज किए जाएंगे। ऐप में भरे हुए डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकी फीचर जोड़े गए हैं, जिससे कोई डेटा लीक या किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो।

लोग स्वयं भी भर सकेंगे फॉर्म:
सरकार इस बार लोगों को स्वयं-गणना यानी सेल्फ इन्यूमरेशन का विकल्प भी देगी। लोग मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं भी भर सकेंगे। इससे यह जनगणना की प्रक्रिया तेज होगी और सिस्टम का भार भी कम होगा। जिन लोगों के पास मोबाइल या इंटरनेट  की सुविधा नहीं है, उनके लिए फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों का डेटा दर्ज किया जाएगा ।