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2 जुलाई 2026:

उत्तर प्रदेश प्रयागराज:

जुलाई का महीना खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है l इस महीने अंतरिक्ष में कई दुर्लभ और खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे l ग्रहो के आपसी मिलन के साथ ही चंद्रमा ,मंगल और प्लेसीड्स (Pleiades) (कृतिका तारा समूह) मिलकर आसमान में एक अद्भुत त्रिभुजाकार आकृति बनाएंगेl 

11 जुलाई :अर्धचंद्र, मंगल और प्लेसीड्स (Pleiades) का त्रिकोण

11 जुलाई को सूर्योदय से करीब 2 घंटे पहले पूर्व दिशा में एक अनोखा त्रिकोण बनता दिखाई देगा इस त्रिभुजाकार आकृति में एक तरफ पतला अर्धचंद्र होगा, दूसरी तरफ लाल रंग का मंगल ग्रह और तीसरी तरफ चमकीले तारों का समूह प्लेसीड्स (Pleiades) होगा ।

यूं तो इसे सामान्य आंखों से भी देखा जा सकता है लेकिन दूरबीन की मदद से यह नज़ारा कहीं अधिक स्पष्ट और खूबसूरत दिखाई देगा । प्लेसीड्स (Pleiades) को भारतीय खगोल विज्ञान में कृतिका नक्षत्र कहा जाता है l इसे सेवन सिस्टर और मेजर 45 के नाम से भी जाना जाता है ।  यह पृथ्वी के सबसे नजदीक मौजूद खुले तारा समूह में से एक है।   वैसे तो आसमान में इसके केवल 6 या 7 तारे ही दिखाई देते हैं ,लेकिन वास्तव में यह करीब 1000 तारों का एक समूह है। वृषभ तारामंडल के उत्तर पश्चिम में स्थित इस समूह का आकार एक छोटा चम्मच जैसा नजर आता है । 

इस महीने इसके अलावा भी कई अन्य रोमांचक खगोलीय घटनाएं होने जा रही हैं ।

7 और 8 जुलाई को शनि और चंद्रमा का मिलन हो रहा है ।‌पूर्व दिशा में सूर्योदय से ठीक पहले यह दृश्य देखा जा सकेगा।

14 जुलाई को अमावस्या होने के कारण आसमान में चांद की रोशनी नहीं होगी।  अंधेरा घना होने की वजह से इस रात हमारी आकाशगंगा और अन्य  चमकीले तारे बेहद साफ और स्पष्ट रूप से देखे जा सकेंगे ।

17 जुलाई को शुक्र और चंद्रमा की युति होगी ।  शाम ढलने के बाद पश्चिम दिशा में शुक्र ग्रह और चंद्रमा एक साथ बेहद खूबसूरत अंदाज में नजर आएंगे ।

29 जुलाई को होने वाली पूर्णिमा के चांद को पारंपरिक रूप से वक मून कहा जाता है ।  यह नाम हिरण के सींगों के बढ़ने के मौसम से जुड़ा है ,क्योंकि इस समय नर हिरन के नए सींग तेजी से बढ़ते हैं ।  इसे थंडर मून या हे मून भी कहा जाता है । जिसका सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा के रूप में बड़ा आध्यात्मिक महत्व है ।

महीने के अंत में उल्का पिंडों की बारिश

जुलाई के आखिरी हफ्ते में डेल्टा एक्वेरियस और अल्फा कैप्रीकॉरनीड्स उल्का बौछारें अपने चरम पर होगी ।  जवाहर तारामंडल के विशेषज्ञों के अनुसार 30 जुलाई की रात सबसे ज्यादा उल्कापात देखने को मिलेगा। यह सिलसिला अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी रहेगा जिससे रात 2:00 बजे के आसपास साफ आसमान में बेहद अच्छे से देखा जा सकेगा ।


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