12 मई 2026

सोमनाथ:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक अमृत महोत्सव में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने 11 पवित्र तीर्थों के जल से मंदिर के शिखर कलश का अभिषेक किया। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में पीएम ने भारत के स्वाभिमान और शक्ति पर ज़ोर दिया।
समारोह की मुख्य बातें:
शिखर कलश अभिषेक: प्रधानमंत्री ने रिमोट के जरिए 90 मीटर ऊँची क्रेन से सोने के कलशों को मंदिर के शिखर पर स्थापित कर अभिषेक किया। इससे पहले उन्होंने भगवान सोमनाथ की महापूजा और जलाभिषेक भी किया।
सरदार पटेल को श्रद्धांजलि: मंदिर परिसर पहुँचने पर प्रधानमंत्री ने सबसे पहले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने याद दिलाया कि आज़ादी के बाद सरदार पटेल के प्रयासों से ही सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हो पाया था।
सरदार गौरव रत्न अवार्ड: गुजरात की 11 पाटीदार संस्थाओं की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को ‘सरदार गौरव रत्न अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
अहम प्रतिमा का अनावरण: प्रधानमंत्री ने ‘सरदार धाम’ में सरदार पटेल की 50 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया और धाम संकुल के तीसरे चरण का लोकार्पण भी किया।
वायुसेना का प्रदर्शन: कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायुसेना की ‘सूर्यकिरण’ टीम ने 6 हॉक विमानों के साथ आसमान में तिरंगा बनाया और मंदिर के ऊपर फूलों की वर्षा की।
प्रधानमंत्री के संबोधन के प्रमुख अंश:
पीएम ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सदियों के कलंक को मिटाने जैसा था। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज़ादी के बाद लंबे समय तक देश के स्वाभिमान के प्रतीकों की उपेक्षा की गई।
उन्होंने गर्व से कहा कि दुनिया की कोई भी शक्ति भारत को झुकने पर मजबूर नहीं कर सकती।
पीएम ने उल्लेख किया कि जिस तरह सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ, उसी तरह अब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी 500 वर्षों के संघर्ष के बाद पूरा हुआ है।
प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में ख़ुद पूजा-अर्चना की और वहां की सजावट व माहौल को देखकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। इस दो दिवसीय गुजरात दौरे के समापन पर उन्होंने राज्य के विकास और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की प्रतिबद्धता दोहराई।